Big Breaking: देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में आज झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर सुनवाई हुई। यह सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच में हुई। जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में परीक्षा रद्द कर नए सिरे से प्रारंभिक परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई।
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सीबीआई नहीं तो स्वतंत्र जांच कमेटी से कराए जांच
मिली जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार, जेएसएससी और जेपीएससी को नोटिस किया है। याचिकर्ता ने कोर्ट के समझ पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। याचिक में कहा गया है कि अगर सीबीआई जांच नहीं होती है, तो झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी बनाई जाए और पूरे मामले की जांच कराई जाए। सुनवाई के दौरान याचिकर्ता ने परीक्षा के संचालन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, ओएमआर शीट की कस्टडी और मूल्यांकण प्रक्रिया में गभीर अनियमितता के आरोप लगाए है। उनका साफ तौर कहना है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है। अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी जरूरी है। साथ ही पूरी परीक्षा रद्ध करने की अपील कोर्ट से की गई है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नई प्रारंभिक परीक्षा साथ ही तय सुरक्षा मानकों के तहत परीक्षा कराने का प्रस्ताव दिया गया है।
झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर लगाई है रोक
हालांकि झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही जेपीएससी परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी। गुरूवार को हाईकोर्ट में सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है।
एक कॉपी वायरल होने के बाद बढ़ा था विवाद
देखा जाए तो झारखंड में यह विवाद परीक्षा के बाद वायरल हो रहे ओएमआर के बाद विवाद काफी बढ़ गया था। अभ्यर्थी ने 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए थे। इसके बावजूद उसे परीक्षा में सफल घोषित कर दिया गया था। अभ्यर्तथियों ने ने इसी मामले के आधार पर पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। जिसके बाद 25 जुलाई से रांची के बापू वाटिका में छात्रों ने अपना प्रदर्शन शुरू किया था। करिब 26 दिन तक चले झारखंड में छात्रों के आंदोलन के बाद छात्रों ने सरकार के सामने अपनी 5 मांगे रकी थी औऱ सरकार को दो महीने का अल्टिमेटम दिया था। छात्रों ने चेतावनी दी थी कि मांगे पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाए। लेकिन राज्य सरकार के 22 नियुक्ति परीक्षाएं रद्द कर दी थी। उसके बाद चयनित कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद अब यह मामला झारखंड के केंद्र में आ कर रह गया है। एक तरफ छात्र प्रदर्शन कर रहे है तो दूसरी तरफ कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है। अब देखना होगा आगे यह मामले क्या नया मोड़ लेकर आता है।

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