ऑटो हादसे में 2 सह-यात्रियों की मौत, खुद पहुंचे अस्पताल… 3 साल बाद उसी खिलाड़ी ने भारत को दिलाया ‘गोल्ड Medal’
हरियाणा के 23 वर्षीय शूटर कमलजीत की यह संघर्षगाथा केवल एक खेल पदक की कहानी नहीं है, बल्कि यह कहानी है – अटूट हौसले, वित्तीय तंगहाली और मौत को मात देकर आसमान छूने के जज्बे की।
जब लगा कि सब कुछ खत्म हो गया…
साल 2023 में जब कमलजीत अपनी शूटिंग प्रैक्टिस के बाद ऑटो-रिक्शा से अपने गांव सुल्खा (हरियाणा) लौट रहे थे, तभी एक भीषण सड़क दुर्घटना हुई। इस दर्दनाक हादसे में उनके साथ सफर कर रहे दो सह-यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। कमलजीत किसी तरह जीवित तो बच गए, लेकिन उनकी जांघ की हड्डी (Femur Bone) बुरी तरह टूट गई।
एक पेंट फैक्ट्री में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले उनके पिता रतिराम के लिए इलाज का खर्च उठाना बेहद कठिन था। महज 2 एकड़ जमीन और तंगहाली के बावजूद, परिवार ने रिश्तेदारों और दोस्तों से ₹4 लाख का कर्ज लेकर गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज कराया। कमलजीत को एक महीने तक अस्पताल के बिस्तर पर रहना पड़ा।
ब्रिक-डंबल्स से ट्रेनिंग और ₹1.5 लाख की सेकेंड-हैंड पिस्तौल
कमलजीत की शुरुआती ख्वाहिश एथलेटिक्स में परचम लहराकर भारतीय सेना में भर्ती होने की थी, लेकिन पैर में गंभीर चोट के कारण दौड़ना बंद करना पड़ा। इसके बाद 2019 में उनके चाचा दिनेश सोहलोत उन्हें कोचिंग के लिए शूटिंग अकादमी ले गए।
- आर्थिक तंगी का सामना: परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि वे महंगी शूटिंग गन खरीद सकें।
- देसी जुगाड़ और जुनून: घर लौटने के बाद हाथ को स्थिर रखने और कंधों को मजबूत बनाने के लिए कमलजीत ईंटों (Bricks) और डंबल्स का इस्तेमाल करते थे।
- कोच का सहारा: अकादमी में कोचिंग फीस से लेकर शुरुआत में सेकेंड-हैंड पिस्तौल तक का इंतजाम उनके कोच शक्तिपाल और रिश्तेदारों के सहयोग से हुआ।
एशियन गेम्स में रचा इतिहास
हादसे के ठीक तीन साल बाद, कमलजीत ने अपने अटूट विश्वास से शूटिंग रेंज पर वापसी की। एशियाई खेलों में 23 वर्षीय कमलजीत ने सुरुचि सिंह फोगट के साथ जोड़ी बनाकर 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्सड टीम इवेंट में भारत के लिए स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीता।
दोनों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए शूटिंग का पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया और देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
रंग लाई मेहनत: कभी सेना में भर्ती होने के लिए दौड़ लगाने वाले कमलजीत आज अपनी इसी खेल प्रतिभा और स्पोर्ट्स कोटा के बदौलत भारतीय सेना में ‘हवलदार’ के पद पर कार्यरत हैं।

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