सोशल मीडिया की दुनिया में भावनाएं जितनी जल्दी जागती हैं, उतनी ही तेजी से धोखा भी सामने आ जाता है। X (पूर्व में ट्विटर) पर एक 16 साल के लड़के की दर्दभरी पुकार ने हजारों लोगों का दिल पिघला दिया, लेकिन महज 24 घंटे के अंदर वही भावुक कहानी एक बड़े डिजिटल क्राउडफंडिंग स्कैम में तब्दील हो गई।
अगर आप भी सोशल मीडिया पर किसी की मदद के लिए UPI ट्रांसफर कर देते हैं, तो Jay Singh Rathore (@jayrathore9008) से जुड़ा यह पूरा वाकया आपको हैरान भी करेगा और सतर्क भी।
1 मिनट की समरी (Fast Facts)
- दावा: 12 साल की छोटी बहन की आँखों की रोशनी बचाने के लिए ₹10–₹20 के छोटे डोनेशन की अपील।
- कलेक्शन: 24 घंटे के भीतर इंटरनेट यूज़र्स ने इमोशनल होकर ₹1.5 लाख से ज़्यादा दान कर दिए।
- टर्निंग पॉइंट: मशहूर अस्पताल (Shroff Eye Centre) ने लेटरहेड और डॉक्यूमेंट्स को फर्जी (Fake) घोषित कर दिया।
- सच्चाई: X Space पर लाइव ग्रिलिंग के दौरान लड़के ने माना कि बहन बीमार नहीं थी, बात पिता की थी और रीच पाने के लिए उसने मनगढ़ंत ड्रामा रचा।
कहानी की शुरुआत: एक भावुक पोस्ट और ₹1.5 लाख की मदद
21 सितंबर को X पर एक पोस्ट वायरल होती है। खुद को अजयवीर/जय सिंह राठौर बताने वाले 16 साल के लड़के ने अपनी 12 साल की बहन की बीमारी का हवाला दिया। उसने लिखा कि परिवार इलाज में ₹2.5 लाख गंवा चुका है और अब अगले ऑपरेशन के लिए पैसों की सख्त किल्लत है।
“अगर आप बड़ी रकम नहीं दे सकते तो सिर्फ ₹10 या ₹20 दे दीजिए, या पोस्ट शेयर कर दीजिए…”
झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्टSpecial Report
इस मासूम अपील ने X कम्युनिटी को झकझोर कर रख दिया। बड़े-बड़े इंफ्लुएंसर्स और आम यूज़र्स ने पोस्ट शेयर की। देखते ही देखते 24 घंटे में ₹1.5 लाख से ज्यादा रुपये लड़के के खाते में जमा हो गए। लड़के ने फिर एक अपडेट डालकर UPI QR कोड हटा दिया कि “अब जितने पैसों की जरूरत थी, उससे ज्यादा आ चुके हैं।”
पर्दाफाश: अस्पताल की चेतावनी और फर्जी रिपोर्ट्स
जब कुछ सजग यूज़र्स ने पोस्ट में अटैच की गई मेडिकल रिपोर्ट्स और एस्टिमेट शीट्स को बारीक नज़रों से देखा, तो डॉक्टर के नाम और लेटरहेड की बनावट संदिग्ध लगी।
मामला तब भड़क गया जब Shroff Eye Centre ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर अलर्ट जारी करते हुए लिखा:
🚨 WARNING/ALERT: “हमारे ध्यान में आया है कि किसी व्यक्ति ने अस्पताल के लेटरहेड का दुरुपयोग करके फर्जी मरीज, पर्चा और बिल एस्टिमेट तैयार किया है और NGOs व लोगों से पैसे ऐंठ रहा है। कृपया इस धोखेबाज़ी से बचें।”
अस्पताल के इस स्टेटमेंट ने इंटरनेट पर सनसनी फैला दी। जिस लड़के को लोग मसीहा समझकर मदद कर रहे थे, उस पर सीधे जालसाजी के आरोप लगने लगे।
‘Chai Pe Charcha’ और Late-Night X Space का खौफनाक खुलासा
अस्पताल की रेड-फ्लैग चेतावनी के बाद 22-23 सितंबर की रात X पर देर रात तक ऑडियो डिस्कशन (X Spaces) चले। हजारों लोग जय सिंह को लाइव सुनने और सवाल पूछने के लिए जुड़े।
ग्रिलिंग के दौरान जो बातें सामने आईं:
- बहन नहीं, कहानी फर्जी थी: जय सिंह ने माना कि उसकी बहन की आँखों का कोई ऑपरेशन नहीं होना था।
- पिता का नाम और ‘फन’ का बयान: उसने दावा किया कि बीमार उसके पिता थे, लेकिन इंटरनेट पर रीच (Attention) पाने के लिए उसने बच्ची की बीमारी और नकली रिपोर्ट्स का सहारा लिया। बहस के दौरान उसने एक जगह यह भी कह दिया कि उसने यह “मज़े के लिए (for fun)” किया था, जिससे यूज़र्स का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
- रोते हुए माफी और रिफंड का वादा: बाद में दबाव बढ़ता देख वह X Space में ही रोने लगा और अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए डोनेट करने वालों के पैसे लौटाने की बात कहने लगा।
क्या डोनेट करने वालों को पैसे वापस मिले?
जय सिंह ने दावे के तौर पर कुछ बैंक ट्रांजैक्शन और बैलेंस स्क्रीनशॉट साझा किए, जिसमें उसका बैलेंस ₹1.58 लाख से घटकर ₹1.37 लाख दिख रहा था।
हालाँकि, यूज़र्स का कहना है कि स्क्रीनशॉट में बैलेंस कम होना इस बात का सबूत नहीं है कि पैसा असली दानदाताओं को वापस मिल चुका है। फिलहाल X पर लोग साइबर क्राइम सेल से इस पूरे नेटवर्क की जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Akash Kumar Singh is an IT Executive & SEO Specialist at Khabar Mantra. A Full-Stack Developer, AI/ML Engineer, and EdTech Founder (Dilwado), he scales platforms serving 10K+ students, commands a 400K+ subscriber tech channel, and drives high-performance web growth.









