झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के निधन के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो भी रूपी सोरेन के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने रूपी सोरेन को केवल शिबू सोरेन की पत्नी नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन से जुड़ी एक आंदोलनकारी और मातृतुल्य व्यक्तित्व बताया।
सुदेश महतो ने कहा कि रूपी सोरेन ने शिबू सोरेन के आंदोलन के संघर्षपूर्ण दौर को केवल देखा नहीं, बल्कि उसे जिया था। उनके अनुसार, जब कोई आंदोलनकारी अनिश्चित भविष्य की तलाश में संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ता है, तब पीछे रह जाने वाले परिवार की स्थिति को समझना भी जरूरी है। इसी वजह से उन्होंने रूपी सोरेन को एक आंदोलनकारी के रूप में याद किया।
उन्होंने कहा कि झारखंड ने एक मातृतुल्य आंदोलनकारी को खो दिया है। सुदेश महतो के मुताबिक, रूपी सोरेन ने गुरुजी के संघर्ष के दिनों में परिवार और आंदोलन, दोनों के कठिन दौर को करीब से देखा और सहा। उनके निधन को उन्होंने एक बड़ी व्यक्तिगत और सामाजिक क्षति बताया।
हेमंत सोरेन के परिवार के लिए बड़ा झटका
सुदेश महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के दुख का जिक्र करते हुए कहा कि 12 से 14 महीनों के भीतर परिवार ने मां और पिता दोनों को खो दिया। उन्होंने कहा कि यह हेमंत सोरेन और पूरे परिवार के लिए बेहद बड़ा झटका है।
उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि माता-पिता दोनों का साया उठ जाने के बाद ईश्वर पूरे परिवार को इस कठिन समय से उबरने की ताकत और क्षमता दें।
राज्य में लगातार हुई घटनाओं पर भी बोले सुदेश
बातचीत के दौरान सुदेश महतो ने हाल के समय में राज्य में हुई अन्य दुखद घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई ऐसी दिवंगत आत्माएं हमसे जुदा हुई हैं, जिन्हें अभी अपने परिवार और सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं होना था।
उन्होंने कहा कि राज्य के अंदर लगातार ऐसी परिस्थितियां बनी हैं और अब उनकी कामना है कि झारखंड इन परिस्थितियों से बाहर निकले। सुदेश महतो ने इस पूरे संदर्भ में ईश्वर से राज्य के लिए बेहतर परिस्थितियों की कामना की।
अंतिम दर्शन के दौरान मौजूद थे कई गणमान्य लोग
रूपी सोरेन के अंतिम दर्शन के लिए मोरहाबादी स्थित आवास पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के कई लोग पहुंचे। सुदेश महतो ने बताया कि वहां राज्यपाल, कई कैबिनेट मंत्री, राजनीतिक नेता और उनके सहयोगी मौजूद थे। अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर को पैतृक गांव नेमरा ले जाने की तैयारियां भी चल रही थीं।
रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर 2026 को रांची में हुआ। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनका अंतिम संस्कार 8 अक्टूबर को पैतृक गांव नेमरा में राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की जानकारी सामने आई है।

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