रांची/लातेहार: बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा में उनका निधन हो गया। उन्हें कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल के अनुसार करीब 45 मिनट तक CPR दिया गया था।
नाना पाटेकर के निधन की खबर से देशभर में उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं और फिल्म जगत की हस्तियों ने उनके निधन पर दुख जताया है।
लेकिन नाना पाटेकर को झारखंड के लोग एक अलग वजह से भी याद करते हैं। लातेहार का बेतला और फिल्म ‘अपहरण‘ से जुड़ी उनकी यादें आज भी स्थानीय सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा में रहती हैं।
‘अपहरण‘ के दौरान झारखंड पहुंचे थे नाना पाटेकर
प्रकाश झा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘अपहरण‘ साल 2005 में रिलीज हुई थी। फिल्म में अजय देवगन के साथ नाना पाटेकर ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नाना पाटेकर की दमदार संवाद अदायगी और उनके किरदार ने फिल्म को अलग पहचान दी।
झारखंड में फिल्म की शूटिंग से जुड़ी यादों को लेकर बेतला और आसपास के इलाकों का भी जिक्र मिलता रहा है। उस दौर में बड़े बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी स्थानीय लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी।
बेतला के जंगल और नाना पाटेकर की यादें
लातेहार का बेतला राष्ट्रीय उद्यान झारखंड की सबसे खूबसूरत प्राकृतिक जगहों में शामिल है। घने जंगल, पहाड़ और शांत वातावरण फिल्मों की शूटिंग के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर नाना पाटेकर की सादगी और उनके सहज व्यवहार को लेकर किस्से आज भी सुनने को मिलते हैं। पर्दे पर बेहद गंभीर और प्रभावशाली किरदार निभाने वाले नाना पाटेकर निजी जिंदगी में अपनी सादगी और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते थे।
यही वजह है कि उनके निधन के बाद झारखंड के सिनेमा प्रेमियों के बीच भी उनकी यादें ताजा हो गई हैं।
पर्दे का रौब, असल जिंदगी में सादगी
नाना पाटेकर उन कलाकारों में रहे जिन्होंने अपने अभिनय से किरदारों को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि उन्हें यादगार बना दिया। ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘सलाम बॉम्बे!’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनकी अलग-अलग भूमिकाओं ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के अलावा 2013 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।
नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति है। झारखंड में भी उनके प्रशंसक उन्हें उनके दमदार अभिनय, रौबीली आवाज और सादगी के लिए याद कर रहे हैं।
नाना पाटेकर चले गए, लेकिन उनके किरदार और संवाद लंबे समय तक दर्शकों के बीच जिंदा रहेंगे।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
Expertise: Journalism • Digital Media • Ground Reporting • Content & Social Media • Video Production • News Analysis









