Khabar Mantra: भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, उत्तर प्रदेश के सिरसा गांव के रहने वाले 25 वर्षीय लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने मंगलवार को एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता. उन्होंने 28 मिनट 17.92 सेकंड में यह दौड़ पूरी कर एक शानदार प्रदर्शन किया.
संघर्ष और संकल्प की कहानी
गुलवीर सिंह का सफर आसान नहीं था. एक छोटे किसान के बेटे के रूप में, उन्होंने सीमित संसाधनों के साथ कड़ी मेहनत की. उनके प्रशिक्षण का प्रारंभ गांव की धूल भरी पगडंडियों से हुआ, जहां वे सूर्योदय से पहले अभ्यास करते थे और खेती में अपने परिवार की मदद भी करते थे. उचित खेल उपकरण, पोषण और पेशेवर कोचिंग की कमी के बावजूद, उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ता के दम पर सफलता हासिल की.
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छात्र स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद, उन्हें राष्ट्रीय एथलेटिक्स शिविरों में स्थान मिला. पिछले कुछ वर्षों में, उन्होंने कई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में शीर्ष स्थान हासिल किया है और लगातार अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाया है. एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप से पहले, उन्होंने बेंगलुरु स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) केंद्र में विशेष ऊंचाई प्रशिक्षण और गति सुधार पर ध्यान केंद्रित किया.
भारतीय लंबी दूरी की दौड़ में नया अध्याय
भारत लंबे समय से 10,000 मीटर जैसी लंबी दूरी की दौड़ों में संघर्ष करता रहा है, जहां आमतौर पर केन्या और इथियोपिया जैसे पूर्वी अफ्रीकी देशों का दबदबा रहा है. हालांकि भारतीय धावकों और भाला फेंक खिलाड़ियों ने वैश्विक स्तर पर सफलता प्राप्त की है, लेकिन लंबी दूरी की दौड़ों में यह पहली बड़ी उपलब्धि है.
गुलवीर सिंह की जीत ने यह साबित कर दिया कि ग्रामीण भारत में अपार प्रतिभा है और सही दिशा-निर्देशन से वे भी उच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं. भारतीय एथलेटिक्स महासंघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह प्रदर्शन दर्शाता है कि विकेंद्रीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निवेश करना कितना महत्वपूर्ण है. साथ ही यह हमें याद दिलाता है कि प्रतिभा केवल महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें इसे खोजकर संवारना होगा.”
सिंह की जीत ऐसे समय में आई है जब सरकार और निजी खेल संस्थाएं खेलो इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभा की खोज कर रही हैं.
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भविष्य की राह: पेरिस 2028 पर नजर
हालांकि यह स्वर्ण पदक भारत के लिए गर्व का क्षण है, लेकिन सिंह अब आगे की तैयारियों में जुट गए हैं. उनका समय 28:17.92 एशियाई स्तर पर तो प्रभावशाली है, लेकिन ओलंपिक के लिए आवश्यक 27:00.00 के मानक से अभी थोड़ा पीछे है. उनके कोच के अनुसार, यदि उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिले, तो वह 10,000 मीटर में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकते हैं.
गांव में उनके स्वर्ण पदक जीतने की खबर से जश्न का माहौल बन गया. उनके पिता, जो छोटे स्तर पर गन्ने की खेती करते हैं, ने गर्व से कहा, “हमारे पास बहुत कम था, लेकिन हमारे पास उम्मीद थी. आज मेरे बेटे ने पूरे गांव को गर्व से भर दिया.”













