रांची: क्या वाकई झारखंड शहीदों की धरती है या यह सिर्फ चुनावी भाषणों का एक घिसा-पिटा जुमला बनकर रह गया है? हर साल सिद्धो-कान्हो, बिरसा मुंडा, निर्मल महतो से लेकर सुनील महतो तक को श्रद्धांजलि देने की रस्में निभाई जाती हैं, लेकिन उनकी कुर्बानियों से प्रेरणा लेने की कोई ईमानदार कोशिश नज़र नहीं आती।
शहीदों के नाम पर ‘इमोशनल फ्रॉड’?
नेताओं के भाषणों में शहीद ज़रूर होते हैं, लेकिन उनके विचार और आदर्श कहीं नहीं दिखते। बलिदान अब एक ‘इवेंट मैनेजमेंट’ की तरह हो गया है—फोटो, पोस्टर, माल्यार्पण और संकल्प… लेकिन संकल्प भी अब अरबपति बनने के सपने तक सीमित रह गया है।
अफसरशाही बनाम लोकतंत्र: कौन चला रहा है राज्य?
झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था आज भी औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त है। अफसरशाही लोकतंत्र को निगल चुकी है। IAS क्लब, IPS क्लब जैसी विशेष सुविधाएं हैं, लेकिन विधायकों के लिए कोई प्लेटफॉर्म तक नहीं! जनप्रतिनिधि केवल ‘सजावटी फूलदान’ बनकर रह गए हैं।
“सिस्टम नहीं बदला, बल्कि अब लूटना और ‘लीगल’ हो गया है।”
RIMS: इलाज नहीं, इंतज़ार का नाम
राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल, RIMS, आज आम गरीब के लिए एक ‘त्रासदी केंद्र’ बन गया है। इलाज से ज्यादा यहां जुगाड़ और धक्के चलते हैं। वहीं, बड़े अफसरों और नेताओं के परिजन निजी अस्पताल चला रहे हैं, जहां VIP इलाज मिलता है। क्या ये टकराव नहीं?
स्मार्ट सिटी या सत्ता का शाही महल?
“स्मार्ट सिटी” योजना में विस्थापितों की ज़मीन पर आलीशान बंगले, VIP रूट और क्लब तैयार किए जा रहे हैं। लेकिन इसमें आम जनता का हिस्सा क्या है? विकास के नाम पर भोग विलास का एक नया केंद्र बन चुका है यह प्रोजेक्ट।
राजनीति + अफसरशाही = लूट का नया मॉडल
राज्य में भ्रष्टाचार एक उद्योग का रूप ले चुका है। एक समय का सहायक अभियंता आज कई आईएएस अधिकारियों को जेब में रखकर चलता है। नेताओं और अफसरों की मिलीभगत ने पूरे सिस्टम को खोखला कर दिया है।
“बाहरी बनाम भीतरी” सिर्फ जनता को बाँटने का हथकंडा
जब-जब लूट की बात आती है, तो भीतरी-बाहरी सब एकजुट हो जाते हैं। लड़ाने के लिए जाति और क्षेत्र की बात होती है, लेकिन लूटने के लिए सबकी साझेदारी होती है।
सत्ता का असली चेहरा: मदिरा, मांस और मर्सिडीज़
राज्य की सत्ता अब विकास या सेवा नहीं, मदिरा, मॉल, मर्सिडीज़ और मांसाहार की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य अब बस भाषणों तक सिमट चुके हैं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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