जमशेदपुर: Tata Steel के पूर्व स्पोर्ट्स ऑफिसर और देश के महान एथलीटों में शुमार अर्जुन अवार्डी सरदार Balwinder Singh Dhaliwal का निधन हो गया। 68 वर्षीय धालीवाल लंबे समय से फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे थे। सोमवार को उन्होंने चंडीगढ़ स्थित लिवासा अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से खेल जगत, टाटा स्टील परिवार और उनके हजारों शिष्यों में शोक की लहर दौड़ गई है।
लगातार 10 साल रहे नेशनल शॉट पुट चैंपियन
पंजाब के गुरदासपुर के मूल निवासी Balwinder Singh ने भारतीय एथलेटिक्स में अपनी अलग पहचान बनाई थी। शॉट पुट प्रतियोगिता में उनका ऐसा दबदबा रहा कि वह लगातार दस वर्षों तक राष्ट्रीय चैंपियन बने रहे। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया गया था। खेलों में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
सेवानिवृत्ति के बाद भी खेलों से जुड़े रहे
टाटा स्टील से सेवानिवृत्त होने के बाद भी बाबा धालीवाल ने खेलों से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI), एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और पंजाब यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने का कार्य जारी रखा। वर्तमान में वह चंडीगढ़ में अपनी स्पोर्ट्स अकादमी संचालित कर रहे थे।
उनकी अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर 20 से अधिक खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया और कई पदक अपने नाम किए। खेल प्रतिभाओं को तराशने में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय थे
खेलों के अलावा बाबा धालीवाल सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाते थे। वह दिल्ली स्थित गुरुद्वारा बाबा विरसा सिंह गोविंद सदन के प्रबंधन से भी जुड़े हुए थे और विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में योगदान देते रहे।
3 जून को होगा अंतिम संस्कार
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, Balwinder Singh धालीवाल का अंतिम संस्कार 3 जून को चंडीगढ़ के सेक्टर-25 स्थित श्मशान घाट में किया जाएगा। उनकी बेटी हरमन कौर के इंग्लैंड से लौटने के बाद उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
खेल जगत ने जताया गहरा शोक
उनके निधन पर टाटा स्टील खेल विभाग के अधिकारियों, सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह, अंतरराष्ट्रीय साइकिलिस्ट इंद्रजीत सिंह, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रणजीत सिंह, शैलेंद्र सिंह समेत कई खेल संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
खेल प्रेमियों का कहना है कि बाबा धालीवाल का जाना भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। एक खिलाड़ी, प्रशिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।









