पहले NEET पेपर लीक ने देश की शिक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया था, और अब CBSE का On-Screen Marking (OSM) विवाद देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। लाखों छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह और सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटा दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल दो अधिकारियों को हटाने से 46 लाख छात्रों का भरोसा वापस आ जाएगा?
आखिर क्या है CBSE OSM विवाद?
CBSE ने 2026 की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा में पहली बार On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया था। इस डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था के तहत उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर ऑनलाइन जांचा गया।
CBSE का दावा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और मानवीय गलतियां कम होंगी। लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद देशभर से छात्रों की शिकायतों का अंबार लग गया।
कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें दिखाई गई उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपियां धुंधली थीं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई कॉपियों की हैंडराइटिंग उनकी नहीं थी। वहीं कई छात्रों ने अनचेक्ड उत्तर, पोर्टल क्रैश और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में भारी अव्यवस्था की शिकायत की।
छात्रों की प्रमुख शिकायतें
- धुंधली स्कैन कॉपियां
- कथित हैंडराइटिंग मिसमैच
- अनचेक्ड उत्तर
- OSM पोर्टल क्रैश
- री-इवैल्यूएशन में तकनीकी समस्याएं
- फीस भुगतान में दिक्कतें
- अंकों में कथित गड़बड़ियां
इन शिकायतों ने छात्रों और अभिभावकों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी।
सरकार का बड़ा एक्शन
मंगलवार, 2 जून 2026 को केंद्र सरकार ने मामले को गंभीर मानते हुए CBSE के दोनों शीर्ष अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिया। इसके साथ ही On-Screen Marking सेवाओं की खरीद और कार्यान्वयन प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।

Cabinet Secretariat द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांच समिति की अध्यक्षता Capacity Building Commission की Chairperson S. Radha Chauhan करेंगी। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट Department of Personnel & Training (DoPT) को सौंपनी होगी।
विवाद के केंद्र में Coempt Edutech
पूरे विवाद का सबसे चर्चित पहलू वह कंपनी है जिसे CBSE ने OSM सिस्टम का ठेका दिया था।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि OSM का कॉन्ट्रैक्ट पाने वाली Coempt Edutech पहले Globarena नाम से जानी जाती थी। आरोप है कि इस कंपनी का नाम पहले भी परीक्षा संबंधी विवादों में सामने आ चुका है।
हालांकि CBSE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कंपनी का चयन सभी सरकारी नियमों और General Financial Rules के अनुसार किया गया था। बोर्ड का कहना है कि 28 अगस्त 2025 को Central Public Procurement Portal पर विधिवत RFP जारी की गई थी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
मामले को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रहा है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि OSM सिस्टम को लागू करने से पहले पायलट प्रोजेक्ट चलाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। विपक्ष का कहना है कि यदि पहले सीमित स्तर पर परीक्षण किया गया होता तो लाखों छात्रों को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
विपक्ष की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- स्वतंत्र जांच
- SIT गठन
- टेंडर प्रक्रिया की जांच
- प्रभावित छात्रों को राहत
- जवाबदेही तय करना
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार पूरे मामले की समीक्षा कर रही है और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
OSM सिस्टम का उद्देश्य क्या था?
On-Screen Marking प्रणाली को पारंपरिक मूल्यांकन व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए लाया गया था।
इस मॉडल के तहत:
- उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं
- शिक्षक ऑनलाइन मूल्यांकन कर सकते हैं
- जोड़-घटाव की त्रुटियां कम होती हैं
- परिणाम जल्दी घोषित किए जा सकते हैं
- मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी आसान होती है
लेकिन इस बार सामने आई शिकायतों ने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBSE OSM विवाद केवल एक तकनीकी समस्या नहीं बल्कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है। सरकार द्वारा शीर्ष अधिकारियों को हटाना और जांच समिति गठित करना एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन असली सवाल अभी भी बाकी है क्या जांच रिपोर्ट छात्रों के सवालों का जवाब दे पाएगी और शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल कर पाएगी?









