CJP Leaders Released: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को करीब 23 घंटे हिरासत में रखने के बाद रविवार, 11 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस ने तीनों को दिल्ली कैंट स्थित एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर उन्हें रिहा कर दिया। तीनों नेताओं ने ₹50 हजार का जमानती मुचलका भी भरा।
CJP नेताओं की हिरासत और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। रविवार को छुट्टी के दिन सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। वहीं, CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
CJP के तीन नेताओं को लिया गया था हिरासत में
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया था। पुलिस के मुताबिक, तीनों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था।
पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रविवार, 11 अक्टूबर को तीनों नेताओं को दिल्ली कैंट की SEM कोर्ट में पेश किया। इसके बाद उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर ₹50 हजार का जमानती मुचलका भरा। कोर्ट से रिहाई मिलने के बाद तीनों नेता हिरासत से बाहर आ गए।
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहाई
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों नेताओं को इस शर्त पर रिहा किया गया है कि वे एक साल तक शांति भंग नहीं करेंगे। जमानती मुचलके की शर्तों का उल्लंघन करने पर उनकी जमानत की रकम जब्त होने की कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, शांति बनाए रखने की शर्त का मतलब यह नहीं है कि तीनों नेता एक साल तक प्रदर्शन नहीं कर सकते। वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कानून और मुचलके में तय शर्तों का पालन करना होगा। यदि वे किसी नए अपराध में शामिल पाए जाते हैं, तो पुलिस उस मामले में अलग से कानूनी कार्रवाई कर सकती है।
CJP का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। शनिवार को पुलिस ने प्रदर्शन को रोक दिया था और करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी।
CJP ने रविवार को लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन करने की घोषणा की। इस घटनाक्रम के बीच विपक्षी नेताओं की हिरासत और प्रदर्शन रोकने की पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
दिल्ली में पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। रविवार को विशेष पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। पहली याचिका में 250 ट्रेनों को रद्द करने और 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के मामले में गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और DMRC चेयरपर्सन डी. थारा के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है।
दूसरी याचिका में विपक्षी नेताओं की हिरासत को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है। इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहता है, इस पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
क्या एक साल तक प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे CJP नेता?
तीनों नेताओं की रिहाई के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे एक साल तक किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकते। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रिहाई की शर्त शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार से संबंधित है। इसका अर्थ अपने आप में प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।
हालांकि, किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी शर्तों का पालन करना जरूरी होगा। मुचलके की शर्तों का उल्लंघन होने पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
फिलहाल, CJP के तीनों नेताओं को ₹50 हजार का जमानती मुचलका भरने और एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया है। दूसरी ओर, दिल्ली में पुलिस कार्रवाई और विपक्षी नेताओं की हिरासत से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









