Koderma: कोडरमा जिले में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) मामलों के निष्पादन में लापरवाही बरतने वाले अंचल अधिकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने झारखंड राज्य सेवा गारंटी अधिनियम-2011 के तहत जिले के पांच अंचल अधिकारियों पर कुल 2.68 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। आदेश के अनुसार, जुर्माने की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से काटी जाएगी।
आठ बार पत्र जारी कर मामलों के निष्पादन का दिया गया निर्देश
जिला प्रशासन के अनुसार, 9 जुलाई को आयोजित राजस्व समीक्षा बैठक में वर्ष 2024 से जून 2026 तक लंबित दाखिल-खारिज मामलों की समीक्षा की गई। इस दौरान सामने आया कि राजस्व शाखा की ओर से आठ बार पत्र जारी कर समय पर मामलों के निष्पादन का निर्देश दिया गया था।
इसके अलावा हर महीने होने वाली समीक्षा बैठकों में भी बिना किसी आपत्ति वाले मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकांश अंचलों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
समीक्षा में केवल कोडरमा अंचल का प्रदर्शन संतोषजनक पाया गया, जबकि अन्य अंचलों में बड़ी संख्या में मामले 30 दिनों से अधिक समय तक लंबित रहे। इसे सेवा गारंटी अधिनियम की धारा 7 और 8 का उल्लंघन मानते हुए उपायुक्त ने प्रत्येक लंबित मामले पर 1,000 रुपये के हिसाब से आर्थिक दंड लगाया।
जयनगर अंचल अधिकारी पर 95 हजार रुपये का जुर्माना
सबसे अधिक 95 हजार रुपये का जुर्माना जयनगर अंचल अधिकारी पर लगाया गया है। इसके अलावा चंदवारा, डोमचांच, मरकच्चो और सतगावां के अंचल अधिकारियों पर भी लंबित मामलों के अनुसार जुर्माना लगाया गया है।
प्रशासन का कहना है कि आम नागरिकों को समय पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा संदेश भी है। इससे भविष्य में म्यूटेशन मामलों के समयबद्ध निष्पादन की उम्मीद बढ़ी है।

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