Ranchi: देशभर में बढ़ते डॉग बाइट और आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकारों और स्थानीय निकायों को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कहा कि आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को डर के माहौल में जीने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
लेकिन राजधानी रांची में हालात अब भी बदले हुए नजर नहीं आ रहे। शहर के कई इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बना हुआ है और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
53 वार्डों में डॉग फीडिंग जोन की योजना, लेकिन जमीनी असर नहीं
कुछ महीने पहले Ranchi Nagar Nigam ने शहर के सभी 53 वार्डों में “डॉग फीडिंग जोन” बनाने की पहल शुरू करने का दावा किया था। निगम की ओर से कहा गया था कि आवारा कुत्तों को नियंत्रित करने और सार्वजनिक जगहों पर उनके जमावड़े को रोकने के लिए विशेष फीडिंग जोन बनाए जाएंगे।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार 53 में से करीब 20 जगहों की पहचान भी कर ली गई थी और बाकी स्थानों को फाइनल करने की प्रक्रिया जारी थी। दावा किया गया था कि इस व्यवस्था से लोगों और जानवरों के बीच संतुलन बनाया जा सकेगा।
लेकिन कई महीने गुजर जाने के बाद भी शहरवासियों को इसका कोई बड़ा फायदा मिलता नजर नहीं आ रहा।
Hope and Animal Trust पर उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार, Ranchi Nagar Nigam ने आवारा कुत्तों के नियंत्रण और संबंधित कार्यों की जिम्मेदारी Hope and Animal Trust नाम की थर्ड पार्टी एजेंसी को सौंप रखी है।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी की ओर से जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद त्वरित समाधान नहीं मिलता और कई मामलों में सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है।
Ranchi Nagar Nigam की वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मौजूद है, लेकिन लोगों का आरोप है कि शिकायतों के निवारण की प्रक्रिया बेहद धीमी और कमजोर है।
बच्चों और बुजुर्गों में डर का माहौल
शहर के कई इलाकों में आज भी झुंड में घूम रहे आवारा कुत्ते लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। खासकर सुबह और रात के समय बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में डर का माहौल बना रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार स्कूल जाने वाले बच्चों और राहगीरों को कुत्ते दौड़ा लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था नजर नहीं आती।
करोड़ों के शेल्टर होम की योजना भी अधर में
जानकारी के मुताबिक करोड़ों रुपये की लागत से डॉग शेल्टर होम बनाने की योजना भी लंबे समय से अटकी हुई है। पहले जमीन नहीं मिलने की बात सामने आई थी। बाद में आईटीआई बजरा इलाके में जमीन चयन की चर्चा हुई, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई बड़ा काम जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नगर निगम की योजनाएं फाइलों से बाहर कब निकलेंगी?
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन, पार्क और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नसबंदी के बाद कुत्तों को उन्हीं सार्वजनिक स्थानों पर वापस नहीं छोड़ा जा सकता, जहां से उन्हें हटाया गया था।
कोर्ट ने अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षित माहौल में जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
सबसे बड़ा सवाल — राहत कब?
Ranchi में डॉग फीडिंग जोन, हेल्पलाइन, शिकायत पोर्टल और शेल्टर होम जैसी योजनाओं के बावजूद शहरवासियों को आवारा कुत्तों के आतंक से राहत नहीं मिल पा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी क्या नगर निगम और Hope and Animal Trust की व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी, या फिर जमीन पर भी कोई ठोस बदलाव दिखाई देगा?

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
Expertise: Journalism • Digital Media • Ground Reporting • Content & Social Media • Video Production • News Analysis








