Jharkhand: झारखंड अधिविद्या परिषद (JAC), रांची ने वर्ग 8 बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल 23 दिसंबर 2025 को खोला और 16 जनवरी 2026 को बंद कर दिया। इसी बीच 24 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक राज्य के अधिकांश विद्यालय शीतकालीन अवकाश के कारण बंद रहे। छुट्टियों के चलते बड़ी संख्या में छात्र अपने गांव या राज्य से बाहर चले गए, वहीं कई स्कूलों में तकनीकी समस्याओं के कारण बच्चों का डाटा एंट्री तो हो पाया लेकिन फाइनल सबमिशन नहीं हो सका। इसका सीधा असर यह हुआ कि हजारों रेगुलर छात्रों का रजिस्ट्रेशन समय पर पूरा नहीं हो पाया।
तिथि बढ़ाने की मांग और बोर्ड का सख्त रुख
समस्या सामने आने के बाद कई शिक्षक संगठनों ने JAC के अध्यक्ष और सचिव से रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाने का आग्रह किया। शिक्षकों का तर्क था कि यदि पोर्टल एक दिन के लिए भी दोबारा खोल दिया जाए तो अधिकांश बच्चों का रजिस्ट्रेशन रेगुलर श्रेणी में हो सकता है। हालांकि, बोर्ड की ओर से तिथि बढ़ाने पर सहमति नहीं बनी और बाद में यह कह दिया गया कि छूटे हुए बच्चे विशेष परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।
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विशेष परीक्षा का विकल्प: समाधान या नया संकट
रेगुलर छात्रों को विशेष परीक्षा में बैठने का विकल्प दिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया। शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि जो बच्चे नियमित रूप से स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं, उन्हें विशेष परीक्षा में भेजना उनके मनोबल को तोड़ने जैसा है। इससे बच्चों में मानसिक दबाव बढ़ रहा है और वे खुद को अन्य छात्रों से अलग और कमजोर महसूस कर रहे हैं, जबकि गलती उनकी नहीं बल्कि व्यवस्था की है।
स्कूलों की भूमिका और सिस्टम की चूक
इस पूरे मामले में स्कूलों की लापरवाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह केवल स्कूलों की मनमानी का मामला नहीं है। जब रजिस्ट्रेशन की अवधि का बड़ा हिस्सा स्कूल अवकाश में बीता, तकनीकी दिक्कतें सामने आईं और समय बेहद सीमित रखा गया, तब यह स्पष्ट रूप से सिस्टम और योजना निर्धारण की चूक भी नजर आती है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी स्कूलों पर डालना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा।
शिक्षा सचिव और मंत्री तक पहुंचा मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव उमा शंकर सिंह से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। शिक्षा सचिव ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जैक अध्यक्ष से बात करने और समाधान निकालने का भरोसा दिलाया है। वहीं Khabar Mantra Digital के संपादक राजेश सिंह द्वारा शिक्षा मंत्री सुदिव्य सोनू से इस मुद्दे पर बातचीत किए जाने के बाद मंत्री ने भी शीघ्र कार्रवाई और उचित आदेश जारी करने का आश्वासन दिया है।
एक दिन का फैसला, हजारों बच्चों का भविष्य
इस पूरे प्रकरण का विश्लेषण यह बताता है कि यदि रजिस्ट्रेशन पोर्टल को केवल एक दिन के लिए भी दोबारा खोल दिया जाता, तो हजारों रेगुलर छात्रों की समस्या समाप्त हो सकती थी। इसके बावजूद बच्चों को विशेष परीक्षा की ओर धकेलना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक सख्ती मानवीय दृष्टिकोण पर भारी पड़ रही है। गलती बच्चों की नहीं है, फिर भी उसकी कीमत वही चुका रहे हैं।
बच्चों के हित में फैसले की दरकार
यह मामला अब केवल तकनीकी रजिस्ट्रेशन की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रश्न बन चुका है। यदि समय रहते मानवीय और व्यावहारिक निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका असर बच्चों के भविष्य और समाज के भरोसे—दोनों पर पड़ेगा। अब सबकी निगाहें सरकार और झारखंड अधिविद्या परिषद के अगले कदम पर टिकी हैं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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