Jharkhand: झारखंड पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में एक और बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन नवजीवन-2 के तहत भाकपा (माओवादी) के 16 नक्सलियों ने झारखंड पुलिस मुख्यालय में आत्मसमर्पण किया। इनमें कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा का बॉडीगार्ड शनिचरा और गांधी उर्फ संतोष भी शामिल हैं, जिसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इससे पहले 21 मई को भी झारखंड में 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। लगातार हो रहे सरेंडर से राज्य में नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है।
जानकारी के अनुसार, हाल के अभियान में छत्तीसगढ़ के 8 नक्सली पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि आज झारखंड के 16 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। दोनों अभियानों को मिलाकर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे झारखंड में अब लगभग 20 सक्रिय नक्सली ही शेष बचे हैं, जबकि नक्सल प्रभावित चाईबासा क्षेत्र में इनकी संख्या घटकर केवल 6 रह गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से की जानी बाकी है।
झारखंड पुलिस का मानना है कि लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान और पुनर्वास नीति के कारण बड़ी संख्या में माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इससे राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आत्मसमर्पित नक्सलियों की कुल संख्या — 16
- आत्मसमर्पित RCM की संख्या — 01
- आत्मसमर्पित ZCM की संख्या — 03
- आत्मसमर्पित SZCM की संख्या — 03
- आत्मसमर्पित ACM की संख्या — 06
- आत्मसमर्पित Cadre की संख्या — 03
समर्पित हथियारों की कुल संख्या — 11
- इंसास रायफल — 06
- AK-47 रायफल — 02
- HK-33 रायफल — 01
- US Carbine रायफल — 01
- M-16 रायफल — 01
समर्पित मैगजीन की कुल संख्या — 38
- एलएमजी मैगजीन — 03
- इंसास रायफल मैगजीन — 28
- AK-47 रायफल मैगजीन — 04
- US Carbine रायफल मैगजीन — 02
- M-16 मैगजीन — 01
समर्पित कारतूसों की कुल संख्या — 1562 राउंड
- इंसास — 786 राउंड
- AK-47 — 229 राउंड
- HK-33 — 208 राउंड
- US Carbine — 95 राउंड
- M-16 — 244 राउंड
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे झारखंड में अब लगभग 20 सक्रिय नक्सली ही शेष बचे हैं, जबकि नक्सल प्रभावित चाईबासा क्षेत्र में इनकी संख्या घटकर केवल 6 रह गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से की जानी बाकी है।
झारखंड पुलिस का मानना है कि लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियान और पुनर्वास नीति के कारण बड़ी संख्या में माओवादी संगठन छोड़कर मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। इससे राज्य के नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति और विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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