Ranchi: झारखंड की सियासत में जो पतवार थामेगा, उसे जेएमएम के निर्णय का सम्मान भी करना होगा। गठबंधन की नाव में जो सफर करेगा, उसे झामुमो के फैसले के साथ ही चलना होगा। अगर साथ नहीं चले, तो सियासत का हिसाब भी चुकाना होगा। वर्तमान परिस्थिति में यह हिसाब चुका रही है कांग्रेस। ये कहना है जेएमएम के मुख्य प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य का।
कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए प्रणव झा को बनाया उम्मीदवार
झारखंड की खाली हुई दो राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है और चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में भूचाल आ गया है। दरअसल हुआ ये कि 4 जून की देर रात कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए अपना उम्मीदवार उतार दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि 5 जून यानी आज सीएम हाउस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झामुमो के विधायकों की बैठक हुई। इस बैठक के बाद बाहर आए विधायकों ने यह फैसला सुनाया कि पार्टी अब 2 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी।
दूसरी तरह झारखंड के पुराने विधानसभा में कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राज्यसभा उम्मीदवार प्रणव झा और विधायक प्रदीप यादव मौजूद रहे। जहां के राजू ने मीडिया से इस बात को कहते हुए जोर दिया कि हम इंडिया गठबंधन है। झामुमो ने जो भी बाते कही है, उसमें सारे गठबंधन का फैसला होगा जरूरी है। इस लिए पार्टी दोबारा हेमंत सोरेन से मुलाकात करेगी और निर्णय लिया जायेगा।
झामुमो कांग्रेस के एक तरफा फैसले से खुश नहीं है
लेकिन देर शाम तक जिस प्रकार झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का बयान आया उस से तो यह साफ है कि झामुमो कांग्रेस के एक तरफ फैसले से खुश नहीं है। यानी साफ है कि अगर झारखंड में राजनीति करनी है तो झामुमो का फैसला मन होगा और हमारा निर्णय ही सर्वोपरि होगा। सुप्रियो भट्टाचार्य ने गठबंधन की रणनीति और पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य में दो राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है और चुनाव तभी होगा, जब दो से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि महागठबंधन में शामिल झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामदलों के कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं। 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी इन्हीं दलों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और जीत हमारे गठबंधन की हुई। अब चूंकि राज्यसभा का चुनाव है, तो यह चुनाव भी हेमंत सोरेन के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि पार्टी की स्पष्ट मांग है कि दोनों राज्यसभा सीटों पर JMM के उम्मीदवार उतारे जाएं। क्योंकि झामुमो ने विपरीत परिस्थितियों में भी गठबंधन धर्म का पालन करते हुए लगातार दो बड़े चुनाव लड़े हैं और संगठन ने हमेशा सहयोगी दलों का सम्मान किया है।
बिहार में मिले जख्म को नहीं भूल पा रही झामुमो
बिहार विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि वहां JMM को गठबंधन में शामिल नहीं किया गया था, इसके बावजूद पार्टी ने गठबंधन की भावना को बनाए रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार में राजद को मंत्री पद देकर सम्मानजनक भागीदारी दी गई है। इस लिए अब गठबंधन हमारे फैसले को माने।
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वही कांग्रेस की संभावित उम्मीदवार के नाम की चर्चा पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल था या वह उम्मीदवार उतारना चाहती थी, तो पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सहयोगियों से चर्चा करनी चाहिए थी।
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बिना सहमति के किसी नाम की घोषणा करना गठबंधन के भीतर टूट पैदा कर सकता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन पूरी मजबूती के साथ जनता के साथ खड़ा है और वर्ष 2029 तक यह एकजुट रहेगा। लेकिन अंत में सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 16 वाले और 21 वाले, दोनों चाहते है, लेकिन फैसला 28 वाले को ही करना है।
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अब चूंकि यह साफ हो चुका है कि झामुमो अपना मिडिया उतारने जा रही है। अब ऐसे समय में झारखंड की राजनीति आने वाले दिनों में क्या नई कहानी लिखती है। यह देखने वाली बात होगी।

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