Jharkhand: पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) के तहत नियमों को अंतिम रूप देने में अत्यधिक देरी के लिए झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एक बार फिर फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट रूप से नाखुश दिखी और चेतावनी दी कि बिना पालन के बार-बार दिए गए आदेश स्वीकार नहीं किए जाएँगे।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि पेसा नियम को अगली सुनवाई 9 अक्टूबर, 2025 से पहले दाखिल कर दिया जाए। इससे पहले, अदालत ने लघु खनिजों (बालू घाटों) की नीलामी पर लगे प्रतिबंध को हटाने से भी इनकार कर दिया था।
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने एक हस्तक्षेप याचिका प्रस्तुत कर बालू घाटों की नीलामी और बिक्री जारी रखने का आदेश देने का अनुरोध किया। हालाँकि, अदालत ने मामले की सुनवाई अगली तारीख तक स्थगित कर दी और याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर दिए।
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आदिवासी बौद्धिक मंच ने अवमानना याचिका दायर की
आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने जुलाई 2024 में ही सरकार को दो महीने के भीतर पेसा नियमों का मसौदा तैयार कर उन्हें लागू करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पेसा अधिनियम 1996 में लागू होने के बावजूद, झारखंड सरकार ने अभी तक आवश्यक नियम तैयार नहीं किए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यह देरी जानबूझकर की जा रही है, क्योंकि पेसा के तहत लघु खनिजों की नीलामी के लिए ग्राम सभा की मंजूरी आवश्यक है।
पिछले न्यायालय आदेश
पिछली सुनवाई में, याचिकाकर्ता के वकील अजीत कुमार ने तर्क दिया था कि 440 बालू घाटों की वर्तमान नीलामी प्रक्रिया पेसा अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध है क्योंकि इसमें ग्राम सभाओं की सहमति नहीं ली गई है। इस तर्क से सहमत होते हुए, न्यायालय ने नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।
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मुख्य अंश:
* झारखंड उच्च न्यायालय ने पेसा नियमावली दाखिल करने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर, 2025 तय की है।
* लघु खनिज (बालू घाट) नीलामी का निलंबन अगले आदेश तक लागू रहेगा।
* जुलाई 2024 का आदेश दाखिल न करने पर राज्य सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका।
* न्यायालय ने पेसा के तहत प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन में ग्राम सभा की भूमिका पर प्रकाश डाला।
जनजातीय समुदाय, पर्यावरण कार्यकर्ता और वकील इस मामले पर कड़ी नज़र रख रहे हैं क्योंकि यह पेसा के तहत संसाधन अधिकार, जनजातीय स्व-प्रशासन और राज्य की जवाबदेही से संबंधित है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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