Jharkhand News: झारखंड मं राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। एनडीए समर्थित निर्दलिय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के चुनावी मैदान में उतरने के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और झामुमो प्रत्याशी बैद्यनाथ राम की जीत सुनिश्चित कराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कंधो पर है। वहीं परिमल नाथवानी भी जीत के लिए जरूरी 28 वोटों के आंकड़े तक पहुंचने की रणनीति में जुटे हुए है।
Jharkhand News: कांग्रेस और झामुमो में नहीं चल रहा ऑल गुड
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और झामुमो के बीच सब कुछ ऑल गुड नजर नहीं आ रही है। देखा जाए तो परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर विधानसभा परिसर में कांग्रेस के नेताओं और मंत्रियों ने जिस प्रकार विरोध दर्ज कराया था। उसने कई सवाल खड़े कर दिए है। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान झामुमो, राजद और माले के विधायक कांग्रेस के साथ खुलकर खड़े नजर नहीं आ रहे है। कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की नाराजगी औऱ विधानसभा प्रशासन पर लगाए गए आरोपों ने भी गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान की अटकलों को हवा दे दी है। वहीं विधानसभा परिसर में हुए इस विरोद के दौरान स्पीकर की अनुपस्थिति भी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन चुकी है। माना यह जा रहा है कि हाल ही में हुए बंगाल विधानसभा और असम में हुए चुनाव के दौरान सामने आए कांग्रेस-झामुमो मतभेद की झलक एक बार फिर राज्यसभा के चुनाव में दिखाई दे रही है। दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी और राजनीतिक असहजता अब खुलकर तो नहीं लेकर अंदर ही अंदर चर्चा का विषय बन गई है।
राजद और माले ने भी जताई नाराजगी
इधर देखा जाए तो राजद और माले के विधायकों और बड़े नेताओं ने भी कांग्रेस के रवैये पर नाराजगी जताई है। उनका साफ कहना है कि उम्मीदवार चयन से पहले सहयोगी दलों से पर्याप्त संवाद नहीं किया गया। यही वजह रही कि नामांकन विवद के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से दोनों दलों के नेता दूरी बनाए हुए थे। कई नेताओं ने यह भी कहा कि उन्हें विरोध कार्यक्रम की पूर्व से कोई सूचना नहीं दी गई थी।
रांची पहुंच रहे के. राजू और अजय शर्मा
इन तमाम परिस्थियों को देखते हुए कांग्रे आलाकामन भी झारखंड में नजर बनाए हुए है। झारखंड कांग्रेस प्रभारी के.राजू और कांग्रेस के बड़े नेता अजय शर्मा आज रांची पहुंच रहे है। माना यह जा रहा है कि वे राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्ची नेताओं के साथ मंथन करेंगे औऱ गठबंधन की स्थिति पर चर्चा करेंगे। दूसरी तरफ देखा जाए तो एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को 24 विधायकों का समर्थन तो है। लेकिन जीत के लिए चार विधायकों का समर्थन अनिवार्य होगा। नाथवानी खेमें का खुले मंच से यह दावा है कि विभिन्न दलों के नेताओं और कई विधायकों से उनके बेहतर संबंध है, ऐसे में जरूरी समर्थन जुटाना उनके लिए मुश्किल नहीं होगी। अब नजरें इस बात पर है कि मतदान से पहले या मतदान तक झारखंड की सियासत कौन सा नया मोड़ लाती है।









