रांची: झारखंड में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासत गरमाती जा रही है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा विधायक डॉ. Irfan Ansari ने SIR की प्रक्रिया तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।
Irfan Ansari का कहना है कि SIR की प्रक्रिया के चलते आम लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। खासकर गरीब और ग्रामीण परिवारों को जरूरी दस्तावेज जुटाने के लिए अपने काम से समय निकालना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोग कागजात और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर परेशान और चिंतित हैं।
मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड में SIR को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर प्रक्रिया को तत्काल नहीं रोका गया तो उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
Irfan Ansari ने हाल में सामने आई मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति जताई थी।
इन रिपोर्टों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया गया है। अंसारी ने सवाल किया कि अगर आयोग के भीतर ही किसी प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं, तो उन पर क्या निर्णय लिया गया और जनता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
चुनाव आयोग ने दिया अलग पक्ष
हालांकि, इन आरोपों के बीच चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत उसके अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आंतरिक स्तर पर अलग-अलग सुझाव या आपत्तियां सामने आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
यही वजह है कि SIR को लेकर राजनीतिक आरोपों के साथ-साथ चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
बिहार में नाम हटने के विवाद का भी जिक्र
Irfan Ansari ने बिहार और दूसरे राज्यों में SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर उठे विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर चुनाव के बाद किसी मतदाता का नाम दोबारा जोड़ा जाता है, तो पहले उसे हटाने की जरूरत क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि किसी भी पुनरीक्षण प्रक्रिया का असर ऐसे लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए, जो वोट देने के पात्र हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और लोगों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
‘एक भी योग्य मतदाता का नाम नहीं कटना चाहिए’
इरफान अंसारी ने कहा कि उनका मुख्य सवाल यही है कि SIR की प्रक्रिया में किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं कटना चाहिए। उन्होंने झारखंड में चल रही प्रक्रिया की समीक्षा करने और इसे पारदर्शी तरीके से पूरा करने की मांग की।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की। साथ ही कहा कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
फिलहाल झारखंड में SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। एक तरफ विपक्षी नेता प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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