Ranchi : बिहार की राजनीति में आज का दिन काफी अहम रहा। राजधानी पटना के मौर्या होटल में महागठबंधन की एक बड़ी प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जहां कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सर्वसम्मति से यह फैसला हुआ कि आगामी विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम चेहरा बनाया जाएगा, जबकि मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। लेकिन इस बैठक से ज्यादा महत्वपूर्ण महागठबंधन का पोस्टर रहा। क्योंकि आज के पोस्टर ने पूरे गठबंधन की एकता पर सवाल खड़ा कर दिया है।
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दरअसल प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगे महागठबंधन के बड़े से पोस्टर पर नजर डाला जाए तो इस पोस्टर में झारखंड मुक्ती मोर्ची को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। पार्टी का न तो कोई प्रवक्ता दिखाई दिए और न ही पार्टी की तस्वीर। जिससे राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या झामुमो अब महागठबंधन का हिस्सा नहीं रहा?
जेएमएम ने महागठबंधन से की थी 12 सीटों की मांग
यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि दिवाली के दिन ही झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन से खुद को अलग कर लिया था। पार्टी बिहार में चुनाव लड़ने की इच्छुक थी और शुरुआत में 12 सीटों की मांग की थी। लेकिन बाद में 18 अक्टूबर को झामुमो ने घोषणा की कि वह महागठबंधन के सहयोग के बिना 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि, स्थिति तब बदल गई जब राजद की ओर से यह कहा गया कि उम्मीदवार तो राजद के होंगे, लेकिन वे झामुमो के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। इस प्रस्ताव पर कोई स्पष्टता नहीं आई और अंतिम दिन तक झामुमो के किसी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया। नतीजतन, झामुमो बिहार चुनावी दौड़ से बाहर हो गया।
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झामुमो के नेताओं ने इसे महागठबंधन द्वारा किया गया अपमान बताया था। कई प्रवक्ताओं ने खुले मंच से कहा कि पार्टी को अंतिम समय तक अंधेरे में रखा गया। वहीं झारखंड की राजनीति में भी इस मुद्दे ने गर्मी पैदा कर दी थी, क्योंकि झामुमो, जो झारखंड में सत्ता में है, बिहार में महागठबंधन का एक प्रमुख सहयोगी दल माना जाता था। अब जब महागठबंधन की नई प्रेस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर में झामुमो का जिक्र तक नहीं है, तो यह सवाल और गहरा हो गया है कि क्या झामुमो को गठबंधन से बाहर कर दिया गया या उसने खुद किनारा कर लिया?
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देखा जाए तो पोस्टर से गायब होना सिर्फ एक डिज़ाइनिंग भूल नहीं हो सकती, वो भी तब जब महागठबंधन सीएम के चेहरे की घोषणा कर रही हो। ऐसे में इसे भूल तो बिल्कुल नहीं कहा जा सकता बल्कि एक राजनीतिक संदेश देना जरूर कहा जा सकता है या फिर गठबंधन के अंदर कही ना कही मतभेद का जन्म हो चुका है।
महागठबंधन की अंदरूनी स्थिति पर सवालिया निशान
यहां दिलचस्प बात तो यह है कि कुछ समय पहले यानी जब बिहार में वोट अधिकार रैली आयोजित हुई थी, तब झारखंड के मुख्यमंत्री और झामुमो सुप्रीमो हेमंत सोरेन को विशेष सम्मान के साथ मंच पर बुलाया गया था। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन एक ही वाहन में रैली में पहुंचे थे। जो उस समय गठबंधन की एकता की प्रतीक तस्वीर मानी गई थी। लेकिन अब उसी हेमंत सोरेन के पार्टी झामुमो को पोस्टर से दरकिनार कर दिया जा रहा हैं। यह न सिर्फ गठबंधन की अंदरूनी स्थिति पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महागठबंधन के भितर कुछ तो खिचड़ी पक रही है।
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फिलहाल, किसी भी पार्टी ने इस पोस्टर विवाद पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन जिस तरह से घटनाक्रम आगे बढ़ा है, उससे इतना तो तय है कि यह पोस्टर आने वाले दिनों में बिहार और झारखंड दोनों की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकती है। यह मामला सिर्फ सीट शेयरिंग या नामांकन का नहीं, बल्कि राजनीतिक सम्मान और गठबंधन की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि झामुमो इस पोस्टर से गायब होने पर क्या रुख अपनाता है।












