KhabarMantra: जस्टिस भुषण रामकृष्ण गवई ने आज भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में यह शपथ दिलाई.
जस्टिस गवई की यह नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर है. वे न केवल पहले बौद्ध समुदाय से आने वाले मुख्य न्यायाधीश हैं, बल्कि वे अनुसूचित जाति से दूसरे व्यक्ति हैं जिन्हें इस सर्वोच्च पद पर नियुक्त किया गया है. इससे पहले, जस्टिस के.जी. बालकृष्णन ने 2007 से 2010 तक इस पद का कार्यभार संभाला था.
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जस्टिस गवई का जन्म 24 नवंबर 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में हुआ था. उन्होंने 1985 में वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में न्यायिक सेवा में कदम रखा. 2019 में उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया.
उनकी न्यायिक यात्रा में कई महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं, जिनमें 2016 में नोटबंदी के फैसले का समर्थन और चुनावी बॉन्ड योजना को असंवैधानिक ठहराना शामिल है.
जस्टिस गवई ने अपने शपथ ग्रहण समारोह के बाद कहा कि वे सामाजिक और राजनीतिक न्याय के लिए हमेशा प्रयासरत रहेंगे. उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के समानता और गरिमा के सिद्धांतों को अपने न्यायिक कार्यों का आधार बताया.
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान, जस्टिस गवई ने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जो उनके संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है. वहीं, उनकी मां ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया और उनके जीवन के संघर्षों के बारे में बताया.













