पटना: Khan Sir के कोचिंग संस्थान के बाहर 2 जून 2026 को हुए विवाद के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें खान सर के सुरक्षा गार्ड को फायरिंग करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, वायरल वीडियो और घटना से जुड़े उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल करने पर कई सवाल खड़े होते हैं।
क्या है वायरल दावा?
ज्ञान बिंदु एकेडमी की ओर से साझा किए गए वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि फायरिंग किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि Khan Sir के सुरक्षा गार्ड ने की थी। वीडियो में एक व्यक्ति हथियार जैसी वस्तु संभालते हुए दिखाई देता है, जिसके बाद फायरिंग का दावा किया जा रहा है।
वीडियो की पड़ताल में क्या दिखा?
वायरल वीडियो को ध्यान से देखने पर कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं—
• वीडियो में दिखाई देने वाला माहौल अपेक्षाकृत सामान्य नजर आता है।
• आसपास लोगों की गतिविधियां शांत दिखाई देती हैं और भगदड़ या अफरा-तफरी जैसे दृश्य स्पष्ट रूप से नजर नहीं आते।
• वीडियो में रोशनी और आसपास की परिस्थितियां घटना वाली रात के माहौल से अलग प्रतीत होती हैं।
• वीडियो में दिखाई देने वाले दृश्य और 2 जून की रात हुई पत्थरबाजी व हंगामे की घटनाओं के दौरान सामने आए प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण में भीअंतर दिखाई देता है। इन आधारों पर यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता कि वायरल वीडियो उसी समय और उसी घटना का है, जिसकी चर्चा की जा रही है।
पुलिस क्या कहती है?
पटना पुलिस ने घटना की जांच के बाद अब तक फायरिंग की पुष्टि नहीं की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में गोलीबारी के प्रमाण नहीं मिले हैं। पुलिस ने इस मामले को दो कोचिंग संस्थानों के बीच विवाद, मारपीट और पथराव से जुड़ा मामला बताया है।
खान सर ने भी बदला था अपना बयान
घटना के तुरंत बाद खान सर ने फायरिंग होने की बात कही थी। लेकिन बाद में उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि उस समय माहौल तनावपूर्ण था और उन्होंने वही जानकारी साझा की थी जो उन्हें सुरक्षा कर्मियों से मिली थी। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस जांच के निष्कर्षों पर उन्हें भरोसा है।
फैक्ट चेक
अब तक उपलब्ध तथ्यों, पुलिस जांच और वायरल वीडियो के दृश्यात्मक विश्लेषण के आधार पर यह दावा पुष्ट नहीं होता कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति खान सर का बॉडीगार्ड है या उसने 2 जून की रात हुई घटना के दौरान फायरिंग की थी।
वायरल वीडियो और वास्तविक घटना के समय के दृश्य, माहौल तथा परिस्थितियों में अंतर नजर आता है। ऐसे में वीडियो के आधार पर किए जा रहे दावों को फिलहाल भ्रामक (Misleading) माना जा सकता है। जब तक पुलिस या किसी आधिकारिक एजेंसी द्वारा वीडियो की सत्यता और समय की पुष्टि नहीं की जाती, तब तक इसे घटना का निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता।
कारण: वायरल वीडियो का घटना के समय और परिस्थितियों से प्रत्यक्ष संबंध अभी तक प्रमाणित नहीं हुआ है, जबकि पुलिस जांच में फायरिंग की पुष्टि भी नहीं हुई है।









