KhabarMantra: लालबाबू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की…! हालांकि पहले से ख्यातिलब्ध रहे हैं…! फिर भी वह हर एक-दो दिन में पीसी करते रहते हैं… और हाकिम को कोसते रहते हैं…! लालबाबू इन दिनों लाल-पीले हो रहे हैं। कहते हैं कि उनके परिवार को जान का खतरा है…! और हाकिम के अधिकारी ही उनके निर्देश पर उन्हें श्मशान पहुंचाने का कुचक्र रच रहे हैं…! प्रेस वालों से बतियाने समय उनकी बॉडी लैंग्वेज बता रही थी जैसे उनकी कोई करतूत हाकिम के पल्ले पड़ गई है…! उम्र के ढलान पर बैठे लालबाबू हालांकि 2024 में सियासत के खोटे सिक्के साबित हुए हैं…! क्योंकि असम की चाय का कड़वा घूंट पीने के बाद भी वह खामोशी से राज्य में बिखरती पार्टी की बर्बादी देखते रहे..! साहब को सूबेदारी मिली लेकिन सत्ता के सपने अधूरे रह गए…! अब सूबेदार बनने के बाद अपने घर में खामोश रहने वाले लालबाबू हाकिम को और उसकी व्यवस्था को पानी पी-पीकर कोसते रहते हैं…!
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा का सेफ्टी बम फोड़ दिया है…! उन्होंने यह भी कह दिया कि उन्हें जान से मारने की सुपारी अधिकारियों को दे दी गई है..! 2013 में भी उन्हें मारने की सुपारी नक्सलियों को दी गई थी…! और उनकी आवाज को दबाने के लिए दुमका के शिकारीपाड़ा में नक्सलियों ने जानलेवा हमला करने की योजना बनाई थी…! लगे हाथ सत्ता पक्ष के दल के नेताओं ने भी ईंट का जवाब पत्थर से देते हुए सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रोपगेंडा करार दे दिया है…! उन्होंने कहा है कि जब भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई होती है, उनके पेट में दर्द होने लगता है…! हालांकि लालबाबू की सुरक्षा व्यवस्था ज़ेड श्रेणी की है…! फिर भी उन्हें जान का खतरा है… यह समझ से परे है…! यही नहीं वह एसीबी को भी सवाल भेजने लगते हैं…! सत्ताधारी दल के नेता का कहना है कि वह जांच में लगे पदाधिकारियों का हौसला तोड़ने का प्रयास करते हैं…!
दरअसल, विपक्ष में बैठने का फायदा यही है… और राजनीति की नीयत भी कुछ ऐसी ही रही है…! हालांकि लालबाबू के दर्द को तर्कसंगत कहा जा सकता है… क्योंकि नक्सली हमले में उन्होंने अपनों को खोया है…। सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है, अगर लालबाबू ने जान का खतरा बताया है तो, उनकी सुरक्षा की समीक्षा ज़रूर होनी चाहिए ताकि, किसी भी प्रकार से उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा को अपग्रेड किया जा सके।
बहरहाल, पक्ष और विपक्ष की तकरार को राजनीतिक जुमले की नजरों से देखना उचित नहीं होगा…! सुरक्षा समीक्षा होना भी ज़रूरी है। वैसे वास्तव में लालबाबू जी, कोई भारी गलती आपसे हुई है तो स्वीकार कर लीजिए, इसमें हर्ज क्या है…









