Big Breaking: बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनके नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नामांकन खारिज होने जैसे मामलों में आमतौर पर न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करता और ऐसे विवादों का समाधान चुनाव के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से किया जाता है।
Big Breaking: चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत का हस्तक्षेप सीमित-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 329(b) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत का हस्तक्षेप सीमित होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि हर नामांकन विवाद में तत्काल सुनवाई शुरू कर दी जाए तो चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होगी और संविधान की मंशा के विपरीत स्थिति पैदा हो सकती है।
कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन क्यों हुआ था रद्द?
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि भाजपा ने उनके नामांकन पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। इसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने 9 जून को उनका नामांकन निरस्त कर दिया था।
Big Breaking: अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा था पक्ष
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मीनाक्षी नटराजन को चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला मतदाता करते हैं और यदि उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिलते तो वे चुनाव हार जाएंगी।
भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित हो गए। निर्वाचन अधिकारियों ने उन्हें प्रमाण पत्र भी सौंप दिया है।

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