रांची: सर्दियों में घना कोहरा रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर विमानों के परिचालन को प्रभावित करता है। कम विजिबिलिटी के कारण कई बार विमानों को दूसरे एयरपोर्ट पर डायवर्ट करना पड़ता है, जबकि कुछ उड़ानें दो से तीन घंटे तक की देरी से पहुंचती या रवाना होती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए रनवे विस्तार और CAT-II लाइटिंग सिस्टम लगाने की योजना बनाई गई है, लेकिन जमीन अधिग्रहण का विवाद दूर नहीं होने के कारण काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।
एयरपोर्ट के विस्तार की योजना वर्ष 2007-08 में तैयार की गई थी। इसके तहत रनवे की लंबाई बढ़ाने, फॉग लैंडिंग की सुविधा विकसित करने और टर्मिनल बिल्डिंग व पार्किंग का विस्तार करने की योजना है। इसके लिए एयरपोर्ट के आसपास 301 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इस मामले में पिछले 18 वर्षों के दौरान 32 से अधिक उच्चस्तरीय बैठकें होने के बावजूद अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
20 प्रतिशत जमीन पर अटका एयरपोर्ट विस्तार
विस्तार के लिए चिह्नित 301 एकड़ जमीन में से करीब 80 प्रतिशत का अधिग्रहण हो चुका है। शेष 20 प्रतिशत जमीन पर विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर विवाद बना हुआ है। इसी वजह से रनवे विस्तार और अन्य जरूरी सुविधाओं के विकास की योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
20 डिसमिल जमीन की मांग कर रहे विस्थापित
एयरपोर्ट विस्तार की योजना से करीब 240 लोग प्रभावित हो रहे हैं। विस्थापितों के पुनर्वास की योजना तैयार है, लेकिन प्रभावित परिवार प्रत्येक एकल परिवार के लिए 20-20 डिसमिल जमीन की मांग पर अड़े हैं।
विस्थापितों की ओर से प्रकाश टोप्पो ने कहा कि वे एयरपोर्ट विस्तार के विरोध में नहीं हैं और जमीन देने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनकी मांग है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सही व्यवस्था होने के बाद ही जमीन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
कोहरे में डायवर्ट हो सकती हैं उड़ानें
अक्टूबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक करीब 90 दिनों का समय विमानों के परिचालन का विंटर सीजन माना जाता है। इस दौरान सुबह और शाम घना कोहरा रहने से विजिबिलिटी कम हो जाती है, जिसका सीधा असर उड़ानों पर पड़ता है।
अनुमान के मुताबिक, यदि इस अवधि में रोजाना एक विमान भी डायवर्ट होता है, तो करीब 50 विमानों को दूसरे एयरपोर्ट पर भेजना पड़ सकता है। इसके अलावा सुबह और शाम के समय दो से चार उड़ानों के निर्धारित समय से दो से तीन घंटे की देरी से पहुंचने या रवाना होने की आशंका रहती है।
CAT-II लाइटिंग सिस्टम और जरूरी सुविधाओं के अभाव में इस सर्दी में भी यात्रियों को उड़ानों में देरी और डायवर्जन जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
जमीन विवाद सुलझाने का प्रयास जारी: एयरपोर्ट निदेशक
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट के निदेशक विनोद कुमार ने कहा कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर जमीन विवाद को जल्द सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक मामला नहीं सुलझता, तब तक कोहरे के दौरान विमानों की लैंडिंग में परेशानी बनी रह सकती है।
अधिग्रहित जमीन पर 158 से अधिक पक्के निर्माण
रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के अनुसार, एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहित जमीन पर 158 से अधिक पक्के निर्माण हो चुके हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। अतिक्रमण करने वालों को कई बार नोटिस जारी किए गए हैं। अब अतिक्रमण हटाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी है।
एयरपोर्ट विस्तार की योजना का लंबे समय से अटका रहना रांची से हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए चिंता का विषय है। जमीन विवाद का समाधान होने पर ही रनवे विस्तार और कम विजिबिलिटी में विमानों के परिचालन को बेहतर बनाने वाली सुविधाओं का काम आगे बढ़ सकेगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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