Ranchi: झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर रांची में 9 अक्टूबर को ‘मौन भाषा यात्रा’ निकाली जाएगी। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मंच की ओर से आयोजित यह यात्रा मोरहाबादी से शुरू होकर मेन रोड तक जाएगी।
मंच के पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता में बताया कि यह कार्यक्रम पहले 29 सितंबर को प्रस्तावित था, लेकिन उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पुत्री के निधन के बाद बने शोक के माहौल को देखते हुए इसे स्थगित कर दिया गया था। अब 9 अक्टूबर को मौन भाषा यात्रा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
दो महीने से चल रहा है भाषा अधिकार अभियान
जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े अधिकारों और समस्याओं को लेकर मंच की ओर से पिछले करीब दो महीने से अभियान चलाया जा रहा है। मंच के अनुसार, अभियान के तहत भाषा संरक्षण, शिक्षा व्यवस्था, शोध और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। 4 जुलाई को रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में भाषा कॉन्क्लेव आयोजित किया गया था। मंच के मुताबिक इसमें 5 हजार से अधिक भाषाकर्मी, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और बुद्धिजीवी शामिल हुए थे।
इसके बाद 22 जुलाई को जनजातीय एवं क्षेत्रीय शोध संस्थान में ‘भाषा संवाद’ आयोजित किया गया। इसमें जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के साथ आगे की रणनीति पर विचार किया गया।
शिक्षकों की पदोन्नति का मुद्दा भी प्रमुख
मंच ने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा शिक्षकों की पदोन्नति का मुद्दा भी उठाया है। मंच के अनुसार, वर्ष 1986 में विभाग शुरू होने के समय से पढ़ा रहे कई शिक्षकों को अब तक पदोन्नति नहीं मिली है। मंच का कहना है कि इन शिक्षकों ने JPSC और UPSC परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ विद्यार्थियों को शोध कार्य में मार्गदर्शन देने में भी योगदान दिया है।
मंच के मुताबिक प्रथम बैच के कई शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं या उनका निधन हो चुका है और अब करीब 10 से 12 शिक्षक ही बचे हैं। ऐसे में भाषा विभागों में शिक्षकों की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर भी मांग उठाई जा रही है।
नौ जनजातीय-क्षेत्रीय भाषाओं में रोजगार की मांग
भाषा मंच ने झारखंड की नौ जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के विद्यार्थियों के लिए राज्य में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की है। मंच की प्रमुख मांगों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के साथ कॉलेजों में नियमित शिक्षक पदों का सृजन शामिल है। मंच का कहना है कि स्थानीय भाषाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए संस्थागत स्तर पर स्थायी अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
9 अक्टूबर की यात्रा में उठेंगे भाषा अधिकार के मुद्दे
‘मौन भाषा यात्रा’ के जरिए मंच जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, शिक्षकों की पदोन्नति, नए शिक्षक पदों के सृजन और भाषा विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर जैसे मुद्दों को सामने रखने की तैयारी में है।
मोरहाबादी से मेन रोड तक प्रस्तावित यह यात्रा झारखंड में भाषा अधिकार से जुड़े अभियान का अगला चरण होगी। मंच की ओर से लोगों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की गई है।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।







