Delhi: झारखंड की राजधानी रांची के छात्र सार्थक सिद्धांत ने सीबीएसई (CBSE) की ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा खुलासा किया है। मंगलवार को उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। इस दौरान झारखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी मौजूद रहे।
सार्थक सिद्धांत का दावा है कि उसने 12वीं बोर्ड परीक्षा देने के बाद सीबीएसई की नई मूल्यांकन प्रणाली को समझने के लिए टेंडर दस्तावेजों का अध्ययन किया। जांच के दौरान उसे कई ऐसी विसंगतियां मिलीं, जिन्हें उसने सोशल मीडिया और इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक किया।
टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सार्थक के अनुसार फरवरी 2025 में जारी OSM टेंडर के लिए दो प्रमुख कंपनियों-TCS और कोएम्प्ट एजुटेक ने आवेदन किया था। आरोप है कि बाद में मूल टेंडर को सार्वजनिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया और नए टेंडर में कुछ शर्तों में बदलाव कर दिए गए।
छात्र का कहना है कि ब्लैकलिस्टिंग, खराब प्रदर्शन और टर्नओवर जैसी पात्रता शर्तों को इस प्रकार बदला गया जिससे एक विशेष सर्विस प्रोवाइडर को लाभ मिल सके। हालांकि इन आरोपों पर सीबीएसई की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संसदीय समिति के सामने भी रखी बात
मामले की गंभीरता को देखते हुए सार्थक सिद्धांत को संसद भवन में संसदीय समिति के समक्ष भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। इससे यह मुद्दा अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस का हिस्सा बन गया है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
सार्थक का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि छात्रों का भरोसा कायम रह सके।

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