Ranchi: झारखंड के फार्मेसी सेक्टर की व्यवस्था को लेकर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में फार्मेसी को लेकर स्पष्ट नियमावली नहीं होने से इस क्षेत्र में कई तरह की समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने इंडियन फार्मेसी एक्ट, 1948 को ध्यान में रखते हुए राज्य की स्पष्ट नियमावली बनाने की मांग की।
चयन प्रक्रिया में योग्यता को प्राथमिकता मिले
रांची कॉलेज ऑफ फार्मेसी की ओर से विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सरयू राय ने कहा कि नियमों में अस्पष्टता होने पर लोग उसकी खामियों का फायदा उठा सकते हैं। उनके मुताबिक, इसका असर फार्मेसी सेक्टर के मूल उद्देश्यों पर पड़ रहा है।
उन्होंने फार्मेसी काउंसिल में नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाया। सरयू राय ने कहा कि रजिस्ट्रार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर योग्य लोगों को जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने चयन प्रक्रिया में योग्यता को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।
सरयू राय ने झारखंड में तेजी से बढ़ रहे फार्मेसी कॉलेजों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई ऐसे संस्थान चल रहे हैं, जिनकी अर्हता पर सवाल उठते हैं। ऐसे कॉलेजों से पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी उन्होंने चिंता जाहिर की।
सस्ती दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा मिले
फार्मेसी सेक्टर को आम लोगों के लिए अधिक उपयोगी बनाने पर जोर देते हुए उन्होंने सस्ती दवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि दवाएं ऐसी कीमत पर उपलब्ध होनी चाहिए, जिन्हें आम आदमी आसानी से खरीद सके।
सरयू राय ने कहा कि फार्मेसी कौंसिल, शिक्षा और पूरे सेक्टर के संचालन में पारदर्शिता जरूरी है। योग्य लोगों को जिम्मेदारी और स्पष्ट नियम मिलने से व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में रांची कॉलेज ऑफ फार्मेसी के निदेशक वीरेंद्र कुमार सिंह, झारखंड हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता राजीव कुमार और पूर्व गृह सचिव एन.एन. पांडेय समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

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