बारिश की पहली फुहार पड़ते ही कुछ अजीब सा होने लगता है। घर की बालकनी से मिट्टी की सोंधी खुशबू आती है, कहीं दूर मंदिर से घंटियों की आवाज़ सुनाई देती है, और मन अपने आप उस लोटे की तरफ चला जाता है जिसमें अभी-अभी जल भरा गया है। यही सावन है। यही वो महीना है जब गली-गली में “बम बम भोले” के नारे गूंजते हैं और लाखों कांवड़िए नंगे पांव अपने महादेव के लिए जल लेकर निकल पड़ते हैं।
पर एक सवाल हर साल दोहराया जाता है-सही समय क्या है? कहीं मैं वो एक गलती तो नहीं कर बैठूंगा जो पूरी पूजा का असर कम कर दे? अगर आपके मन में भी यही उलझन है, तो सावन सोमवार 2026 से जुड़ी हर ज़रूरी बात यहां मिल जाएगी-बिना किसी लाग-लपेट के, सीधे काम की बात।
सावन सोमवार 2026 की तारीखें
पंचांग के हिसाब से इस बार उत्तर भारत में सावन 30 जुलाई 2026, गुरुवार से शुरू हो चुका है और 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के साथ खत्म होगा। इस दौरान चार सोमवार आ रहे हैं:- पहला सोमवार – 3 अगस्त 2026
- दूसरा सोमवार – 10 अगस्त 2026
- तीसरा सोमवार – 17 अगस्त 2026
- चौथा सोमवार – 24 अगस्त 2026
पहले सोमवार का शुभ मुहूर्त कब है
3 अगस्त को पूजा के लिए ये समय सबसे बेहतर बताए गए हैं:- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:19 से 5:01 तक
- अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: सुबह 5:44 से 7:24 तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 तक
रात में पूजा करें या नहीं
सावन सोमवार पर निशिता काल वाली रात्रि पूजा का उतना चलन नहीं है जितना महाशिवरात्रि पर होता है। यहां फोकस मुख्यतः सुबह के जलाभिषेक और दिनभर के व्रत पर रहता है। फिर भी अगर आपका मन रात में भी पूजा करने का है, तो सूर्यास्त के बाद और आधी रात से पहले का प्रदोष काल वाला समय चुन सकते हैं।जलाभिषेक और रुद्राभिषेक-कब करें, कैसे करें
जल चढ़ाने का सबसे बढ़िया समय सूर्योदय के ठीक बाद से लेकर सुबह 8 बजे तक माना जाता है। और हां, जल चढ़ाते वक्त जल्दबाज़ी बिल्कुल न करें-धार पतली और लगातार होनी चाहिए, ऐसे नहीं कि लोटा उलटकर एक झटके में पूरा पानी बहा दिया। रुद्राभिषेक यानी वैदिक मंत्रों के साथ किया गया विशेष अभिषेक-इसे दोपहर से पहले करना सबसे अच्छा रहता है। घर में शिवलिंग है तो खुद भी “ॐ नमः शिवाय” के साथ जल और दूध चढ़ाकर सादा अभिषेक कर सकते हैं। पर अगर किसी खास मनोकामना या ग्रह दोष की वजह से रुद्राभिषेक करवाना है, तो मंदिर में पंडित जी से करवाना ज़्यादा सही रहता है।पूजा कैसे करें, पूरी विधि
सुबह उठते ही स्नान करें, साफ या भगवा रंग के कपड़े पहनें, सूर्य को जल चढ़ाएं और मन में व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग को गंगाजल या साफ पानी से नहलाएं। फिर बारी-बारी से दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत स्नान करवाएं और आखिर में फिर से साफ पानी चढ़ाएं। अब बेलपत्र, फूल, भांग, धतूरा और अक्षत चढ़ाकर धूप-दीप जलाएं। “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते रहें, चाहें तो शिव चालीसा या शिव तांडव स्तोत्र भी पढ़ें। आखिर में आरती करें और प्रसाद बांट दें। बस, इतना ही काफी है-पूजा जटिल नहीं, भाव सच्चा होना चाहिए।पूजा की थाली में क्या-क्या रखें
गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग, सफेद चंदन, अक्षत, जनेऊ, रुद्राक्ष माला, धूप-दीप, कपूर और शिव जी की एक तस्वीर या मूर्ति-इतना पहले से जुटा लें तो पूजा के बीच में उठकर भागना नहीं पड़ेगा।व्रत रखते वक्त इन बातों का ख्याल रखें
व्रत के दिन प्याज-लहसुन और मांसाहार से पूरी तरह दूर रहें। फल या सादा सात्विक भोजन लें। और सुनिए-निर्जला व्रत हर किसी के लिए ज़रूरी नहीं है। गर्भवती महिलाएं, बुज़ुर्ग और जिन्हें कोई बीमारी है, वे जल या फलों के रस पर रह सकते हैं, ज़बरदस्ती भूखे-प्यासे रहने की कोई ज़रूरत नहीं। शिव जी भाव देखते हैं, कष्ट नहीं। इस दिन गुस्सा करने, झूठ बोलने या बहस करने से बचें-व्रत सिर्फ खाने-पीने का नहीं, मन को शांत रखने का भी है। और पूजा के वक्त काले कपड़े पहनने से बचें, इसे शुभ नहीं माना जाता।महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग नियम
मासिक धर्म के दौरान शिवलिंग को छूना मना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूजा रुक जाए। मन ही मन ध्यान करें, मंत्र जपें या शिव चालीसा पढ़ें-फल में कोई कमी नहीं आती। गर्भवती महिलाएं देर तक खड़े होकर पूजा करने या कठोर व्रत रखने से बचें, डॉक्टर की सलाह हमेशा पहले। पुरुषों के लिए स्नान किए बिना शिवलिंग छूना सही नहीं माना जाता। साथ ही पूजा के समय शरीर पर चमड़े की बेल्ट या पर्स जैसी चीज़ें न रखें। ये भी पढ़ें: आज भी जल रही है त्रेतायुग की अग्नि, इसी मंदिर में हुआ था शिव-पार्वती का दिव्य विवाहये गलतियां भूलकर भी न करें
जल हमेशा धीमी धार में चढ़ाएं, जल्दबाज़ी में नहीं। शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें-आधी परिक्रमा करके वापस आ जाएं, क्योंकि जलधारी को लांघना वर्जित है। स्टील या प्लास्टिक के बर्तन की जगह तांबे, पीतल या चांदी के पात्र का इस्तेमाल करें। और सबसे ज़रूरी बात-शिवलिंग पर तुलसी दल, हल्दी, कुमकुम, नारियल पानी या टूटे हुए चावल कभी न चढ़ाएं। ये सब शिव पूजन में सख्ती से मना है। व्रत के दौरान बहुत ज़्यादा नमक या तला-भुना खाने से भी बचें, वरना व्रत का मकसद ही खत्म हो जाता है।बेलपत्र, धतूरा, भांग, दूध चढ़ाने का सही तरीका
बेलपत्र हमेशा तीन पत्तों वाला और बिना कटा-फटा होना चाहिए, चिकनी सतह ऊपर की तरफ रखें। धतूरा और आक के फूल सिर्फ शिवलिंग को ही चढ़ाए जाते हैं, घर के बाकी देवी-देवताओं को नहीं। कथा है कि समुद्र मंथन के विष को पीने के बाद शिव जी को ठंडक देने वाली यही चीज़ें प्रिय हो गईं। भांग भी इसी वजह से चढ़ाई जाती है, पर इसे शुद्ध रूप में अर्पित करें, प्रसाद के तौर पर इसका सेवन न करें। दूध हमेशा ठंडा और कच्चा चढ़ाएं, गर्म दूध चढ़ाना ठीक नहीं माना जाता। जल जितना हो सके साफ और गंगाजल मिला हुआ हो तो बेहतर है।शिवलिंग पर ये चीज़ें कभी न चढ़ाएं
तुलसी पत्र, हल्दी, कुमकुम या सिंदूर, सीधे नारियल का पानी, टूटे या कीड़े लगे चावल, और केतकी का फूल-ये कभी शिवलिंग पर न चढ़ाएं। हर एक के पीछे कोई न कोई पौराणिक कथा या शाप जुड़ा है, इसीलिए इन्हें अशुभ माना जाता है।व्रत कब और कैसे खोलें
व्रत मंगलवार को सूर्योदय के बाद ही खोलें, सोमवार की रात को जल्दबाज़ी में नहीं। पहले नहा लें, शिव जी को भोग लगाएं, उसके बाद ही खुद फलाहार या सादा भोजन करें। कुछ लोग सोमवार शाम को सूर्यास्त के बाद हल्का फलाहार लेकर ही व्रत पूरा मान लेते हैं-यह आपके घर की परंपरा पर निर्भर करता है, दोनों तरीके सही हैं।शिव पूजा के फायदे-सिर्फ धार्मिक नहीं, ज्योतिषीय भी
सोमवार चंद्रमा का दिन है, और चंद्रमा हमारे मन और भावनाओं का ग्रह माना जाता है। इसीलिए सावन के सोमवार पर शिव पूजा करने से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है, और जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमज़ोर है, उन्हें खास फायदा मिलने की मान्यता है। पूरे महीने किया गया रुद्राभिषेक सेहत, करियर और घर की शांति के लिए भी अच्छा माना जाता है-बस नियमितता ज़रूरी है, एक दिन जोश में पूजा करके बाकी दिन भूल जाना काम नहीं करता। ये भी पढ़ें: Sawan 2026: रांची से बाबाधाम जाना हुआ आसान, 4 स्पेशल ट्रेनें और खादगढ़ा से 6 बसों की व्यवस्थाअविवाहित हों या विवाहित-दोनों के लिए मायने रखता है यह व्रत
कुंवारी लड़कियां अक्सर मनचाहा जीवनसाथी पाने की चाह से यह व्रत रखती हैं-कहते हैं माता पार्वती ने भी शिव जी को पाने के लिए यही तपस्या की थी। विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुखी गृहस्थी की कामना से जुड़ा है। और पुरुष भी करियर, संतान सुख और घर की स्थिरता के लिए इसे उतनी ही श्रद्धा से निभाते हैं।लोग अक्सर ये सवाल पूछते हैं
पीरियड्स के दौरान व्रत रख सकते हैं क्या? शिवलिंग छूना मना है, पर व्रत और मन ही मन पूजा जारी रख सकते हैं। शिवलिंग पर तुलसी चढ़ा सकते हैं? बिल्कुल नहीं, पौराणिक कथा के हिसाब से यह सख्त वर्जित है। जल चढ़ाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सुबह 8 बजे तक सबसे उत्तम है, वैसे दिन में किसी भी वक्त जल चढ़ाया जा सकता है। व्रत न रखें तो भी पूजा का फल मिलेगा? हां, बिल्कुल। सच्चे मन से पूजा करने भर से शिव कृपा मिलती है-व्रत रखना कोई शर्त नहीं है। हर सोमवार का मुहूर्त एक जैसा रहता है? नहीं, नक्षत्र बदलने के साथ मुहूर्त भी थोड़ा बदलता है, इसलिए हर सोमवार सुबह एक बार पंचांग चेक कर लेना बेहतर रहता है। एक आखिरी बात। पंचांग की गणना क्षेत्र और परंपरा के हिसाब से थोड़ी अलग हो सकती है, तो अगर आपके यहां की तारीख या मुहूर्त इस लेख से थोड़ा अलग लगे, तो घबराइए नहीं-अपने इलाके के पंचांग और स्थानीय पंडित जी की बात को ही मानें, वही सही रहेगा। आखिर में बस इतना कि सावन सोमवार सिर्फ मुहूर्त और नियमों की लिस्ट नहीं है। यह एक मौका है खुद को थोड़ा रोकने का, थोड़ा शांत होने का, और भोलेनाथ के सामने वो भाव रखने का जो शब्दों में नहीं आता। नियम याद रखें, गलतियों से बचें, लेकिन सबसे ज़्यादा भरोसा अपनी श्रद्धा पर रखें-क्योंकि महादेव तो एक लोटे जल से भी खुश हो जाते हैं। हर हर महादेव।
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