Ranchi: झारखंड में स्कूली शिक्षा को राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया है कि राज्य की नई भाषा शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें बच्चों को अपनी मातृभाषा में पढ़ने-समझने का अवसर मिले और साथ ही हिंदी, अंग्रेजी तथा डिजिटल शिक्षा में भी उनकी पकड़ मजबूत हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए सक्षम और आत्मविश्वासी बनाना भी है।
मुख्यमंत्री बुधवार को झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से प्रस्तुत ‘झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति’ के प्रारूप की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नीति तैयार करते समय राज्य की स्थानीय भाषाओं, विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों, कौशल विकास और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाए।
मातृभाषा में पढ़ाई से बेहतर होगी बच्चों की समझ
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में बच्चे घर और अपने समुदाय में संताली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खोरठा, नागपुरी सहित कई स्थानीय भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, विद्यालयों में पढ़ाई मुख्य रूप से हिंदी या अंग्रेजी में होती है। भाषा के इस अंतर का असर बच्चों की समझ, अभिव्यक्ति और सीखने की गति पर नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने मातृभाषा, हिंदी और अंग्रेजी को एक-दूसरे का पूरक बनाते हुए शिक्षा नीति तैयार करने का निर्देश दिया। इसके लिए संवर्धनात्मक बहुभाषिकता का सिद्धांत अपनाने पर जोर दिया गया। इसके तहत पहली भाषा को हटाए बिना दूसरी और तीसरी भाषा सीखने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
12वीं से पहले अंग्रेजी बोलने का मिलेगा प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी स्पोकन की कक्षाएं संचालित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा, नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं और खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। ऐसे में अंग्रेजी में संवाद करने का आत्मविश्वास उनके लिए मददगार होगा।
उन्होंने निर्देश दिया कि विद्यार्थियों को 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने से पहले ही अंग्रेजी बोलने और संवाद करने का पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाए।
शिक्षा के साथ हॉकी और डिजिटल कौशल पर भी जोर
हेमंत सोरेन ने कौशल आधारित शिक्षा को भी नई नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि झारखंड के बच्चे-बच्चियां हॉकी में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में हॉकी को भी कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।
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मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से दक्ष बनाने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति में आधुनिक तकनीक और प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए, ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।
तीन शैक्षणिक चरणों में लागू करने का प्रस्ताव
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति तैयार करने के लिए वर्ष 2025 में भाषा शिक्षा नीति निर्माण समिति गठित की गई थी। समिति ने झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों की शिक्षा पद्धतियों का अध्ययन कर प्रारूप तैयार किया है।
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प्रस्तावित नीति में तीन शैक्षणिक चरण निर्धारित किए गए हैं। इनमें पूर्व बाल्यावस्था शिक्षा से कक्षा दो तक, कक्षा तीन से पांच तक और कक्षा छह से बारहवीं तक की पढ़ाई शामिल है। प्रत्येक चरण में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं को शिक्षा से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इस नीति का उद्देश्य स्थानीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन करने के साथ बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना है। फिलहाल बैठक में नीति के प्रारूप पर चर्चा हुई है और अधिकारियों को आवश्यक सुझावों के आधार पर इसे व्यावहारिक स्वरूप देने का निर्देश दिया गया है।
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बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह, झारखंड शिक्षा परियोजना के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, टीआरआई निदेशक आलोक शिकारी कच्छप और जैक सचिव एसडी तिग्गा समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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