Dhanbad: गंभीर आपराधिक मामलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए धनबाद की अदालत ने हत्या के दो अलग-अलग मामलों में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय के इस फैसले को कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया की मजबूती के रूप में देखा जा रहा है।
सरायढेला हत्या मामले में दो दोषियों को उम्रकैद
पहला मामला वर्ष 2012 के सरायढेला थाना कांड संख्या 211/12 से जुड़ा है। इस मामले में अदालत ने अभियुक्त प्रहलाद हाजरा उर्फ राधे को हत्या का दोषी पाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत पांच वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने का भी आदेश दिया गया।
इसी मामले में सह-अभियुक्त जगरनाथ हाजरा उर्फ लालू हाजरा को भी हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
मामले की जांच तत्कालीन आरक्षी निरीक्षक अवधेश यादव ने की थी, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक राजीव कुमार उपाध्याय ने अदालत में प्रभावी पैरवी की।
राजगंज हत्या मामले में भी दोषी को उम्रकैद
दूसरा मामला राजगंज थाना कांड संख्या 58/20 से संबंधित है। इस मामले में अदालत ने कुर्बान अंसारी को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मामले की जांच पुलिस अवर निरीक्षक अभिषेक कुमार ने की थी, जबकि अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी सत्येंद्र कुमार ने सफलतापूर्वक पक्ष रखा।
मजबूत साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला
दोनों मामलों में पुलिस द्वारा किए गए प्रभावी अनुसंधान, प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने दोषियों को कड़ी सजा सुनाई। न्यायिक अधिकारियों का मानना है कि ऐसे फैसले गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने और समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।








