KhabarMantra: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने एक नई अधिसूचना जारी की है, जिसमें सेना प्रमुख को यह अधिकार दिया गया है कि वे जरूरत पड़ने पर टेरिटोरियल आर्मी को भी बुला सकते हैं।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर ये चर्चा तेज हो गई है कि एमएस धोनी और सचिन तेंदुलकर जैसे मानद सैन्य अधिकारी क्या अब सेना के साथ युद्ध में शामिल होंगे?
कौन हैं टेरिटोरियल आर्मी में?
एमएस धोनी को 2011 में टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद उपाधि मिली थी। वहीं सचिन तेंदुलकर को 2010 में भारतीय वायुसेना में ग्रुप कैप्टन की मानद रैंक दी गई थी।
इन रैंकों का मतलब है कि उन्हें सम्मान के तौर पर ये उपाधियाँ दी गईं हैं। वे सक्रिय (Active Duty) सैनिक नहीं हैं।
क्या धोनी और तेंदुलकर को बॉर्डर पर भेजा जाएगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि मानद रैंक वाले अधिकारी आमतौर पर युद्ध में शामिल नहीं होते। उनकी भूमिका प्रेरणात्मक होती है — यानी वे सेना और देशवासियों का मनोबल बढ़ाने में मदद करते हैं।
हालांकि, अगर धोनी या तेंदुलकर चाहें, तो वे कुछ सहायक कामों में भाग ले सकते हैं, जैसे कि राहत कार्य या जागरूकता अभियान।
टेरिटोरियल आर्मी क्या है?
- यह एक रिज़र्व फोर्स है जो संकट के समय सेना की मदद करती है।
- इसमें डॉक्टर, इंजीनियर, सरकारी कर्मचारी और दूसरे नागरिक शामिल हो सकते हैं।
- जरूरत पड़ने पर इन्हें आंतरिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, और रसद सेवाओं में लगाया जाता है।
एमएस धोनी और सचिन तेंदुलकर का युद्ध में सीधे भाग लेना संभव नहीं है। लेकिन वे अपने अनुभव और देशभक्ति के ज़रिए सेना के लिए प्रेरणा जरूर बन सकते हैं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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