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Year Ender 2025 Jharkhand: सियासत से तबाही तक, झारखंड में 2025 की हर बड़ी घटना पर एक नजर

Year Ender 2025: झारखंड के लिए 2025 सियासी संकट, प्राकृतिक आपदाओं, खनन हादसों और आर्थिक पिछड़ेपन से भरा रहा। पढ़ें साल भर की बड़ी नकारात्मक घटनाओं की विस्तृत रिपोर्ट।

दिसम्बर 27, 2025
in झारखंड Jharkhand News
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Year Ender 2025 Jharkhand: From politics to devastation, a look at every major event in Jharkhand in 2025

Year Ender 2025 Jharkhand: From politics to devastation, a look at every major event in Jharkhand in 2025

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Year Ender 2025 Jharkhand: साल 2025 जब विदा हो रहा है, तो झारखंड के पास जश्न से ज्यादा आत्ममंथन की वजहें हैं। यह साल राज्य के लिए स्थिरता नहीं, बल्कि लगातार डगमगाती उम्मीदों का प्रतीक बन गया। कभी सत्ता के गलियारों में उठा तूफान लोगों की बेचैनी बढ़ाता रहा, तो कभी प्रकृति और सिस्टम की मार ने आम आदमी की जिंदगी को झकझोर दिया। राजनीति से लेकर गांव-खेत और खदानों तक, 2025 Jharkhand के लिए एक कठिन इम्तिहान बनकर आया।

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  • राजनीतिक उथल-पुथल: सत्ता, संघर्ष और शोक का साल
  • दशक की सबसे भयावह मानसून तबाही
  • खनन हादसे: धरती के नीचे से निकलती मौत
  • आर्थिक पिछड़ापन और आदिवासी विस्थापन का दर्द

राजनीतिक उथल-पुथल: सत्ता, संघर्ष और शोक का साल

2025 में Jharkhand की राजनीति शांति नहीं, बल्कि उथल-पुथल का पर्याय बनी रही। अगस्त में Jharkhand मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के निधन ने पूरे राज्य को शोक में डुबो दिया। आदिवासी आंदोलन की पहचान रहे सोरेन का जाना न सिर्फ एक नेता का, बल्कि एक युग का अंत माना गया। उनके निधन के बाद पार्टी और सरकार दोनों पर भावनात्मक और राजनीतिक दबाव बढ़ा।

साल भर विपक्ष ने हेमंत सोरेन सरकार पर वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के आरोप लगाए। बीजेपी की चार्जशीट ने सियासी माहौल को और गर्मा दिया। डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आया, जिससे प्रशासनिक अस्थिरता की तस्वीर उभरी।

Read More: New Year Party 2026: 31 दिसंबर की रात रांची में कहां-कहां होगा जश्न? जानिए पूरी लिस्ट

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का पासपोर्ट विवाद सुर्खियों में रहा, वहीं राम नवमी के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा और आदिवासी–मुस्लिम तनाव ने राज्य की सामाजिक सौहार्द को गहरी चोट पहुंचाई। इसी साल स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का निधन भी सरकार और सत्तारूढ़ दल के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इन तमाम घटनाओं ने 2025 को झारखंड की राजनीति के सबसे अशांत वर्षों में शामिल कर दिया।

दशक की सबसे भयावह मानसून तबाही

राजनीतिक हलचल के बीच झारखंड को प्रकृति की मार भी झेलनी पड़ी। 2025 में राज्य में 1,199.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 18 प्रतिशत अधिक थी। जून से सितंबर तक लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने बाढ़, भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियां पैदा कर दीं। बिजली गिरने, डूबने, मकान ढहने और अन्य हादसों में कुल 458 लोगों की मौत हुई। सैकड़ों घर जमींदोज हो गए और हजारों परिवार बेघर हुए। खेती पर निर्भर राज्य में हजारों हेक्टेयर फसल नष्ट हो गई, जिससे किसानों की कमर टूट गई। साहिबगंज में गंगा के उफान ने करीब बीस हजार लोगों को विस्थापित कर दिया। रांची, गुमला, लोहरदगा और सिमडेगा जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। विशेषज्ञों ने इसे जलवायु परिवर्तन और बंगाल की खाड़ी में बढ़ते समुद्री तापमान से जोड़ा।

खनन हादसे: धरती के नीचे से निकलती मौत

खनिज संपदा से भरपूर झारखंड में 2025 खनन मजदूरों के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ। रामगढ़, धनबाद और हजारीबाग जैसे जिलों में खदान धंसने, दीवार गिरने और भूस्खलन की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं। कहीं कोयला खदान का हिस्सा ढह गया, तो कहीं सर्विस वैन खाई में गिर पड़ी। अवैध सोने की खदानों में भी शाफ्ट गिरने से मजदूरों की जान गई। इन हादसों में दर्जनों लोग मारे गए और कई घायल हुए। हर घटना ने यह सवाल दोहराया कि आखिर सुरक्षा मानकों और निगरानी की जिम्मेदारी कौन लेगा। अवैध खनन और जर्जर खदानें झारखंड के मजदूरों के लिए मौत का जाल बनती रहीं।

आर्थिक पिछड़ापन और आदिवासी विस्थापन का दर्द

राज्य गठन के 25 साल बाद भी झारखंड 2025 में आर्थिक मोर्चे पर पिछड़ा नजर आया। प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के मुकाबले घटकर 56.82 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बहुआयामी गरीबी दर 28.81 प्रतिशत रही, जो देश में बिहार के बाद सबसे ज्यादा है। आदिवासी बहुल इलाकों में गरीबी, कुपोषण और साक्षरता की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी रही। कोयला खनन और विकास परियोजनाओं के नाम पर हजारों आदिवासी परिवारों को अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़नी पड़ी। विस्थापन ने उनकी आजीविका, संस्कृति और पहचान को गहरे संकट में डाल दिया। टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में विस्थापन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई। वहीं कुर्मी समुदाय को एसटी दर्जा देने की मांग पर राज्य में सामाजिक तनाव और बढ़ा। बाल श्रम और पलायन जैसी समस्याएं भी साल भर आदिवासी इलाकों की सच्चाई बनी रहीं।

2025 Jharkhand के लिए चेतावनी का साल बनकर सामने आया। यह साल बता गया कि राजनीतिक स्थिरता, प्रशासनिक संवेदनशीलता और सतत विकास के बिना आम जनता को राहत नहीं मिल सकती। अब राज्य की नजरें 2026 पर टिकी हैं, इस उम्मीद के साथ कि नया साल झारखंड को सियासी शांति, सामाजिक संतुलन और विकास की नई राह दिखाएगा।

 

 

V Kumar
V Kumar

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