Papa Rao Naxal Surrender: केंद्र सराकर ने देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। पिछले दो वर्षों में कई नक्सली या तो मारे गए है या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है। छत्तीसगढ़ की बात हो या झारखंड की नक्सली मुक्त बनाने की दिशा में सुरक्षा बल के जवानों को कई सफलता मिली है। इसी कड़ी में सशस्त्र नक्सल आंदोलन के सबसे सक्रिय और खूंखार नक्सली में शामिल पापाराव ने आज अपने 17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता है।
Papa Rao Naxal Surrender: छत्तीसगढ़ में अब तीन बड़े नक्सली शेष
बता दें कि पापा राव के आत्मसमर्पण के बाद छत्तीसगढ़ में सक्रिय बड़े नक्सली नेताओं की संख्या बहुत हद तक कम हो चुकी है। जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में अब केवल तीन बड़े नक्सल लीडर ही सक्रिय रह गए है। हेमला बिच्चा, सोढ़ी केशा और महिला नक्सल कमांडर रूपी। पुलिस के द्वारा बताया जा रहा है कि हेमला बिच्चा और सोढ़ी केशा बीजापुर और तेलंगाना की सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय है। जबकि रूपी छत्तीसगढ़ के आसपास के इलाकों में अपनी टीम के साथ मौजूद है।
Papa Rao Naxal Surrender: नए नक्सलियों को ट्रेनिग और कई जानकारियां देता था पापा राव
ध्यान रहे कि पापा राव की भूमिका बेहद अहम थी, उसके सबसे खौफनाक नक्सली हमलों में शामिल ताड़मेटला कांड को अंजाम दिया था। जिसमें 76 जवानों की शहादत हुई थी। इसके साथ ही वह कई बड़े नक्सली वारदातों में शामिल रह चुका है। संगठन में रहते हुए राव ने ना केवल साचिश रचने का काम किया बल्कि वह नए कैडर को ट्रेनिंग भी देता था। इसके साथ ही आईईडी प्लांट करने, सुरक्षा बलों की टुकड़ियों को एंबुश में फंसाने और जंगल में लंबे समय तक कैसे सरवाईब करना है, इसकी ट्रेनिंग भी पापा राव नए नक्सलियों के देता रहता था।
Papa Rao Naxal Surrender: पापा राव द्वारा फैलाई गई मौत की अफवाह
छत्तीसगढ़ के वरिष्ट पत्रकार विकास तिवारी ने खबर मंत्र से बात चीत में यह भी बताया कि समय-समय पर पापा राव ने अपने जिंदा करते मारे जाने की अफवाह भी फैलाई थी। ताकि वह सुरक्षा बलों के जवानों को चकमा दे सके। नक्सली संगठन में 20 वर्षों तक सक्रिय रहते हुए उसने कई बार अपनी मौत की अफवाह फैलाई। इस अफवाह की खबर ने लगभग सबको यकिन भी दिला दिया था। कभी सांप काटने की बात तो कभी किडनी की बीमारी से मौत की खबर। पापा राव समय समय पर ऐली अफवाह फैलाया करता था। ताकी आम लोगों को और सुरक्षा बल के जवानों को इस बात पर यकिन हो जाए।
छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या अब अपने अंतिम दौर में
देखा जाए तो छत्तीसगढ़ में जिस तरह से शीर्ष नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है। उससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य से नक्सल समस्या अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। बाती शेष सक्रिय नक्सली मुख्यधारा में लौटते है, तो समय रहते राज्य नक्सल मुक्त बनने का लक्ष्य हासिल कर लेगा।
Papa Rao Naxal Surrender: झारखंड में सक्रिय है ये नक्सली
वहीं बात अगर झारखंड की करे तो झारखंड में भी मुख्य रूप से दो नक्सली कमांडर फिलहाल सुरक्षा बल के नजरों से दूर है। जिसमें मिसीर बेहरा और असिम मंडल शामिल है। सुरक्षा बल के जवान लगातार सारंडा में ऑपरेश चला रहे है, लेकिन अब तक इन नक्सलियों का कुछ पता नहीं चल सका है। बताया जाता है कि मिसीर बेसरा और असिम मंडल अपने सदस्यों के साथ जहां स्थित है।
वह इलाका पूरी तरह से आईईडी की जाल में बिझा हुआ है। जिसमें जाने की हिमाकत सुरक्षा बल के जवान भी नहीं करते है। हालांकि सुरक्षा बल के जवानों ने यह दावा किया है कि जल्द ही झारखंड को नक्सल मुक्त बना दिया जाएगा। लेकिन जिस प्रकार डेड लाइन नजदिक आ रही है। उससे कहीं ना कहीं सुरक्षा बल के जवानों के लिए चुनौतियां भी बढ़ा दी है। अब सबकी निगाहे झारखंड में टिकी हुई है कि आखिर कब झारखंड मुक्त के दिशा में आगे बढ़ेगा।












