Ranchi: झारखंड की आस्था का प्रमुख केंद्र रांची पहाड़ी मंदिर एक बार फिर कानूनी सुर्खियों में है। झारखंड उच्च न्यायालय में गुरुवार को वाद संख्या W.P.(C) No. 5123/2026 की सुनवाई के दौरान पहाड़ी मंदिर के संचालन और नियंत्रण को लेकर तीखी बहस हुई। माननीय न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मंदिर की स्वायत्तता और परंपरा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यास बोर्ड की अधिसूचना पर सवाल, ‘कब्जे’ का आरोप
पहाड़ी मंदिर विकास समिति की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने अदालत में पक्ष रखते हुए झारखंड हिन्दू धार्मिक न्यास बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड एक ‘अवैध’ अधिसूचना जारी कर मंदिर के प्रशासन और संचालन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। समिति ने इस नोटिफिकेशन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
हाईकोर्ट की चेतावनी: “हस्तक्षेप हुआ तो वैकेशन में भी खुलेगी अदालत”
सुनवाई के दौरान जब यह बात सामने आई कि फिलहाल मंदिर का संचालन रांची उपायुक्त (DC) की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, तो अदालत ने तत्काल रोक लगाने के बजाय भविष्य के लिए कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि भविष्य में मंदिर समिति की स्थिति में कोई भी हस्तक्षेप या कब्जा करने का प्रयास किया गया, तो न्यायालय के अवकाश (छुट्टी) के दौरान भी इस मामले की विशेष सुनवाई की जाएगी।
चार सप्ताह का समय, महाधिवक्ता ने रखा बोर्ड का पक्ष
न्यास बोर्ड की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने पैरवी की। अदालत ने बोर्ड को अपना विस्तृत जवाब (Counter Affidavit) दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। पहाड़ी मंदिर विकास समिति ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण भरोसा है और वे मंदिर की धार्मिक गरिमा की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।








