Ranchi: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में एक नाम की खूब चर्चा हो रही है। वो नाम है परिमल नाथवानी। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने झारखंड राज्यसभा चुनाव में एकतरफा जीत दर्ज कर सबकों चौंका दिया। कुल मिलाकर उनकी यह तीसरी जीत है जब वे झारखंड से राज्यसभा चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचे हैं। इससे पहले वे आंध्रप्रदेश से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उन्होने झारखंड में सारे कयासों पर विराम लगाते हुए 28 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करते हुए तीसरी बार जीत दर्ज की है। इससे पहले उऩकी पहचान एक नेता के साथ-साथ चर्चित बिजनेसमैन के रुप में भी होती है।
बताते चलें कि इस बार विधानसभा की दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में है। महागठबंधन की तरफ से जेएमएम ने पूर्व मंत्री बैजनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है वहीं कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। वहीं बिजनेसमैन परिमल नाथवानी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान मेें उतरे हैं जिनको बीजेपी का समर्थन प्राप्त था।
जाने कौन हैं परिमल नथवानी
आपको जानकारी के लिए बताते चले कि परिमल नथवानी का जन्म 1 फरवरी 1956 को मुंबई में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध भारतीय उद्योगपति और राजनीतिज्ञ हैं। वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट मामलों के निदेशक के रूप में कार्यरत रहे हैं और समूह के कई बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े रहे हैं।
नाथवानी इससे पहले भी साल 2008 से 2020 तक झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे और बाद में 2020 में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। उनकी भूमिका बिजनेस के साथ-साथ राजनीति में भी अच्छी खासी रही है।
मुंबई में हासिल की शुरुआती शिक्षा
नथवानी ने मुंबई के गोकलीबाई पूनमचंद पीतांबर हाई स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने प्रबंधन में उच्च शिक्षा हासिल की और अहमदाबाद के राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने प्रबंधन और कॉर्पोरेट नेतृत्व में डॉक्टरेट भी किया है। शुरुआती करियर में उन्होंने वडोदरा स्टॉक एक्सचेंज में काम किया और बाद में इसके अध्यक्ष भी बने।
रिलायंस ग्रुप में अहम भूमिका
1997 में वे रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े और धीरे-धीरे कंपनी में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने जामनगर रिफाइनरी, पेट्रोलियम रिटेल नेटवर्क, जियो लॉन्च और रियल एस्टेट परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे मुकेश अंबानी और धीरूभाई अंबानी के साथ मिलकर देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी परियोजनाओं में शामिल रहे।
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राजनीति में लंबा अनुभव
परिमल नथवानी ने 2008 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पहली बार राज्यसभा में प्रवेश किया। 2014 में वे फिर से निर्वाचित हुए। 2020 में वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सांसद बने और बाद में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए।
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2026 में झारखंड राज्यसभा चुनाव में उनकी वापसी ने राजनीतिक हलकों में फिर से उनकी मजबूत स्थिति को दर्शाया है।
सामाजिक और खेल क्षेत्र में योगदान
नथवानी ने गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष के रूप में काम किया और मोटेरा स्टेडियम (अब नरेंद्र मोदी स्टेडियम) के पुनर्निर्माण में अहम भूमिका निभाई।
वे ग्रामीण विकास, मंदिर प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं से भी जुड़े रहे हैं। झारखंड में उन्होंने खेल और बुनियादी ढांचे के विकास में भी योगदान दिया है।
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परिमल नथवानी की सबसे बड़ी ताकत उनका कॉर्पोरेट अनुभव और राजनीतिक संतुलन है। वे उद्योग और राजनीति के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में देखे जाते हैं। उनकी जीत यह भी दिखाती है कि वे सिर्फ एक उद्योगपति नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेता भी हैं।

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