Bihar News: बिहार के भोजपुर के रहने वाले भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। एडीजी सुधांशु कुमार ने माना है कि इस मामले में पुलिस के तरफ से लापरवाही की गई है। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर से पहले यानी 16 जून को जब पुलिस उससे बात करने गई थी, तब पुलिस के द्वारा मामले को ठीक से सुलझाया नहीं गया। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले एक SHO, 2 SI , 1 ASI , 1 कॉन्स्टेबल को सस्पेंड किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई
दूसरी तरफ इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जहां जस्टिस नागरत्ना ने मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि रजिस्ट्रार के सामने मेंशन कीजिए। वो इस केस में लिस्ट करेंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने इस मामले में जनहित याचिका दायर कर एनकाउंटर की जांच स्वतंत्र कराने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है। इधऱ याचिकर्ता ने जस्टिस नागरत्ना की बेंच के सामने मामला रखते हुए जल्द सुनवाई की मांग की है। विशाल तिवारी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस एनकाउंटर में अक्सर एक जैसा कारण बताती है। आरोपी ने पुलिस की बंदूक छीनी, भागने लगा औऱ पुलिस पर हमला करने लगा। इसलिए आत्मरक्षा में गोली पुलिस के तरफ से चलाई गई। इस लिए यह एनकाउंट पूरी तरह फर्जी है, कोर्ट को इस केस में जांच के आदेश देना चाहिए।
एनकाउंटर को लेकर किए जा रहे अलग-अलग दावे
आपकों बता दें कि एनकाउंटर को लेकर अलग-अलद पक्षों के द्वारा अलग-अलग दावे किए जा रहे है। जिसमें घटना को लेकर संदेह की स्थिती बनी हई है। भरत भूषण तिवारी की मौत से जुड़े मामले को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए है, जिसकी सच्चाई अब तक सामने नहीं आई है। हालांकि राज्य पुलिस से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच आवश्यक है। ऐसे में संवतंत्र जांच ही सबसे अधिक कारगर साबित होगी।
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हथियार बरामद करने पहुंची थी पुलिस लेकिन भरत पुलिस को दे रहा था चुनौती
अगर शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के बयान पर गौर करे तो। पहली प्राथमिकी में कहा गया है कि 16 जून को प्राप्त सनहा के आधार पर भरत भूषण तिवारी की गिरफ्तारी और अवैध हथियार बरामद करने के लिए 17 जून को पुलिस टीम बिलौंटी गांव उसके घर पहुंची थी। दरवाजा खुलते ही भरत भूषण उग्र हो गया और पिस्टल से फायर करने का प्रयास करने लगा। घर की छत पर चढ़कर पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की, जिससे पुलिसकर्मी बाल-बाल बजे।
वहीं दूसरी प्राथमिकी पर गौर करे तो मुठभेड़ से संबंधित दूसरी प्राथमिकी में पुलिस ने कहा कि 17 जून की सुबह करीब 8 बजे भरत भूषण हथियार लेकर बधार की ओर भाग रहा था। पुलिस ने जब उसका पीछा किया तो उसने पुलिस टीम पर फायरिंग की। जिसमें एक गोली थाना के सरकारी वाहन के बोनट पर लगी। प्राथमिकी के अनुसार एक हाथ में भरत ने मोबाइल औऱ दूसरे हाथ में पिस्टल लेकर वह लगातार पुलिस को चुनौती दे रहा था। पुलिस का यह भी दावा है कि एक बार उसने पिस्टल फेंक दी थी। लेकिन जब एक जवान हथियार लेने आगे बढ़ा तब वह दोबारा पिस्टल उठाकर पुलिस पर दो राउंड फायरिंग करने लगा। इसके बाद पुलिस के एक जवान ने भरत के कमर के नीचे चार राउंड फायरिंग की। जिसमें गोली उसके पैर में लगी और वह घायल हो गया। जिसके बाद पुलिस के द्वारा उसे शाहपुर अस्पताल ले जाया गया।
भरत तिवारी की मौत के बाद ग्रामीणों ने किया एनएच जाम
बता दें कि भरत तिवारी के एनकाउंट किए जाने और इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद बिलौटी गांव के ग्रामीणों ने एनएच-922 को जाम कर दिया था। जिसके बाद जमकर हंगामा किया गया था। इस मामले में शाहपुर थाना में 14 नामजद औऱ 50 अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं एनकाउंटर के पांच दिन के बाद सीएम सम्राट चौधरी ने मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। मुख्यमंभी ने कहा कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच करवाई जाएगी। हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के दो दिन बाद भी ना तो जांच के लिए किसी को नियुक्त किया गया था औऱ ना ही इसे लेकर कुछ क्लियर बताया जा रहा है। जिसके बाद आज पुलिस के द्वारा कुल 5 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड किया गया है। वहीं दूसरी तरफ आज सुप्रिम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई है।

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