Ranchi: राजधानी रांची में Spa और मसाज सेंटरों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। शहर के कई पॉश इलाकों में बड़े-बड़े मॉल और व्यावसायिक परिसरों के भीतर दर्जनों स्पा सेंटर संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इनमें से कुछ स्पा सेंटरों पर लंबे समय से मसाज की आड़ में अवैध गतिविधियां और देह व्यापार संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं।
रांची में पहले भी कई स्पा सेंटर पुलिस कार्रवाई और छापेमारी की जद में आ चुके हैं। इसके बावजूद शहर के विभिन्न इलाकों में बड़ी संख्या में स्पा सेंटर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो उसकी नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई कैसे सुनिश्चित की जा रही है। कई मामलों में आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद होने की खबरें सामने आई थीं। इसके बावजूद शहर में ऐसे स्पा सेंटरों के संचालन पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।
पॉश इलाकों में तेजी से बढ़ रहे स्पा सेंटर
जानकारी के अनुसार लालपुर, कोकर, कांटाटोली, अशोक नगर, बड़ियातू समेत कई प्रमुख इलाकों में बड़ी संख्या में स्पा सेंटर संचालित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई प्रतिष्ठित मॉल के भीतर एक साथ पांच से छह स्पा सेंटर तक चल रहे हैं। इनमें से कई संस्थान पूरी तरह वैध और पारदर्शी तरीके से केवल वेलनेस और थेरेपी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, लेकिन कुछ पर नियमों के उल्लंघन और अवैध गतिविधियों के आरोप लगातार लगते रहे हैं।
999 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक के पैकेज
शहर के विभिन्न स्पा सेंटरों में अलग-अलग श्रेणी के मसाज पैकेज उपलब्ध बताए जाते हैं। शुरुआती पैकेज करीब 999 रुपये से शुरू होकर 5000 रुपये या उससे अधिक तक पहुंचते हैं। ग्राहकों को रिसेप्शन पर विभिन्न प्रकार की मसाज सेवाओं की जानकारी और शुल्क बताया जाता है।
आरोप यह भी लगते रहे हैं कि कुछ मामलों में ग्राहक के निजी केबिन में जाने के बाद अतिरिक्त और अवैध सेवाओं के लिए अलग से सौदेबाजी की जाती है। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि केवल जांच एजेंसियां ही कर सकती हैं और सभी स्पा सेंटरों पर इस तरह के आरोप लागू नहीं होते।
अलग-अलग राज्यों की युवतियों के काम करने की चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रहती है कि कुछ स्पा सेंटरों में पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों की युवतियां थेरेपिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। केवल किसी व्यक्ति के दूसरे राज्य से होने या स्पा में कार्य करने मात्र से किसी अवैध गतिविधि का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यदि किसी संस्थान में कानून का उल्लंघन होता है तो उसकी पुष्टि जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद ही होती है।
पुलिस कार्रवाई के बावजूद उठ रहे सवाल
समय-समय पर पुलिस द्वारा छापेमारी की कार्रवाई किए जाने के बावजूद सवाल यह उठ रहा है कि यदि लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो ऐसे संस्थानों पर स्थायी और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है। क्या नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं? क्या सभी स्पा सेंटरों के लाइसेंस, कर्मचारियों का सत्यापन और संचालन मानकों की समय-समय पर जांच होती है? ऐसे कई सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं।
सभी Spa सेंटरों को एक नजर से देखना उचित नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे Spa और वेलनेस सेंटर भी संचालित हो रहे हैं जो पूरी तरह कानूनी तरीके से फिजियोथेरेपी, आयुर्वेदिक मसाज, डीप टिश्यू मसाज, स्वीडिश मसाज, अरोमा थेरेपी, फुट रिफ्लेक्सोलॉजी, हॉट स्टोन मसाज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं प्रदान करते हैं। इसलिए कुछ संस्थानों पर लगे आरोपों के आधार पर पूरे स्पा उद्योग को संदेह के दायरे में रखना उचित नहीं होगा।
प्रशासन से पारदर्शी जांच की मांग
शहर के लोगों का कहना है कि यदि किसी स्पा सेंटर में वास्तव में कानून के विपरीत गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, जो संस्थान पूरी तरह नियमों का पालन कर रहे हैं, उनकी छवि भी ऐसी घटनाओं से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। नियमित निरीक्षण, लाइसेंस सत्यापन और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई से ही इस क्षेत्र में पारदर्शिता और कानून व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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