मंगलवार, जुलाई 21, 2026
Khabar Mantra
  • E- Paper
No Result
View All Result
  • Home
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
  • देश
  • क्राइम
  • धर्म-अध्याय
  • बिहार
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
  • खबर हटके
Khabar Mantra

रांची जगन्नाथ मंदिर  की वास्तुकला का अनोखा रहस्य – पहाड़ी पर बसा वो मंदिर जो पुरी की याद दिलाता है

334 साल पहले नागवंशी राजा के सपने से बना यह मंदिर आज भी अपनी वास्तुकला में एक रहस्य समेटे हुए है।

जुलाई 20, 2026
in झारखंड Jharkhand News, धर्म-अध्याय, रांची Ranchi
A A
रांची का जगन्नाथ मंदिर पहाड़ी पर स्थित प्राचीन मंदिर

धुर्वा की पहाड़ी पर स्थित 334 साल पुराना जगन्नाथ मंदिर

Share on FacebookShare on Twitter

धुर्वा की एक छोटी-सी पहाड़ी। शाम का वक्त। हवा में शंख और घंटियों की आवाज़ घुलती है, और सामने खड़ा होता है एक ऐसा मंदिर, जिसे देखकर पहली बार आने वाला हर शख्स एक ही सवाल पूछता है – “क्या ये पुरी है?”

Table of Contents

Toggle
    • जब एक राजा की भक्ति ने पहाड़ी पर मंदिर खड़ा कर दिया
    • वास्तुकला का रहस्य – पुरी जैसा दिखने वाला मंदिर, पर बुनियाद झारखंडी
    • सैकड़ों साल में बदलता रहा स्वरूप
    • धार्मिक महत्व – सिर्फ मंदिर नहीं, आस्था का केंद्र
    • यह मंदिर इतना खास क्यों है?
    • दिलचस्प और कम जाने-माने तथ्य
    • दर्शन का समय और नियम
    • कैसे पहुंचें
    • आसपास घूमने की जगहें
    • यात्रियों के लिए काम की बातें
  • FAQ (Question-Answer Format)

नहीं, ये पुरी नहीं है। ये रांची का जगन्नाथपुर मंदिर है। और इसकी सबसे बड़ी खासियत यही है कि सैकड़ों किलोमीटर दूर, झारखंड की मिट्टी पर बना यह मंदिर आज भी उड़ीसा के जगन्नाथ धाम की झलक अपने भीतर समेटे हुए है। मगर सवाल यही है – आखिर एक नागवंशी राजा ने अपने राज्य में समुद्र किनारे वाले उस भव्य धाम की नकल क्यों बनाई, और इसकी वास्तुकला में ऐसा क्या छिपा है जो इसे आज भी रहस्यमयी बनाता है?

चलिए, इस कहानी को शुरू से समझते हैं।

जब एक राजा की भक्ति ने पहाड़ी पर मंदिर खड़ा कर दिया

बात है सन् 1691 की। नागवंशी वंश के राजा ठाकुर एनी नाथ शाहदेव अपने राज्य से निकलकर उड़ीसा की यात्रा पर गए थे। पुरी पहुंचकर उन्होंने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए। कहा जाता है कि दर्शन के बाद राजा के मन में इतनी गहरी श्रद्धा जागी कि उन्होंने वहीं संकल्प ले लिया – अपने राज्य में भी ठीक वैसा ही धाम बनवाएंगे, जहां उनकी प्रजा बिना पुरी गए भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर सके।

लोक कथाओं में एक और परत जुड़ती है। कहते हैं कि राजा को पुरी से लौटने के बाद सपने में स्वयं भगवान जगन्नाथ ने दर्शन दिए और आदेश दिया कि अपने राज्य में भी उनकी प्रतिष्ठा की जाए। राजा ने इसे ईश्वर का इशारा माना और रांची से लगभग दस किलोमीटर दूर, उदयपुर परगना के जगन्नाथपुर क्षेत्र में एक छोटी पहाड़ी को चुना। यही पहाड़ी आज जगन्नाथ पहाड़ी के नाम से जानी जाती है।

आज लगभग 334 साल बाद भी यह मंदिर उसी श्रद्धा का प्रतीक बना खड़ा है – फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह सिर्फ नागवंशी राजपरिवार की आस्था नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की सांस्कृतिक पहचान बन गया है।

वास्तुकला का रहस्य – पुरी जैसा दिखने वाला मंदिर, पर बुनियाद झारखंडी

यहीं से शुरू होता है असली रहस्य। दूर से देखने पर यह मंदिर लगभग वैसा ही लगता है जैसा पुरी का जगन्नाथ मंदिर – ऊंचा शिखर, उस पर लगा कलश, और नीचे फैला विशाल मंडप। लेकिन गौर से देखिए तो कई फर्क साफ नजर आते हैं।

मंदिर की ऊंचाई लगभग 80 से 90 मीटर ऊंची पहाड़ी पर मापी जाती है, जिससे यह पूरे इलाके में सबसे ऊंचा दिखने वाला ढांचा बन जाता है। शिखर की बनावट उत्तर भारत की नागर शैली से प्रेरित मानी जाती है – यही वजह है कि इसकी बाहरी नक्काशी और खिड़कियों की डिज़ाइन में उड़िया मंदिरों के साथ-साथ राजस्थानी स्थापत्य कला का भी असर झलकता है। कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण में स्थानीय झारखंडी कारीगरों की परंपरागत तकनीक को उड़िया शिल्पकारों की डिज़ाइन के साथ मिलाया गया, जिससे एक ऐसी मिली-जुली स्थापत्य शैली बनी जो देश में कहीं और नहीं मिलती।

यही वजह है कि इतिहासकार और शोधकर्ता इस मंदिर को “मिनी पुरी” तो कहते हैं, लेकिन इसकी दीवारों और खंभों पर बनी नक्काशी को देखकर मानते हैं कि यह सिर्फ नकल नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र स्थापत्य प्रयोग है। गर्भगृह में विराजमान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ प्रतिमाएं भी पुरी की परंपरा के अनुसार ही स्थापित की गई हैं – यानी लकड़ी से बनी, बिना पूर्ण आकार वाली प्रतिमाएं, जो जगन्नाथ पंथ की सबसे पुरानी और रहस्यमयी परंपराओं में से एक मानी जाती हैं।

मंदिर परिसर के घने पेड़ भी इसकी बनावट का हिस्सा हैं। पहाड़ी की चोटी पर हरियाली इतनी घनी है कि गर्मियों में भी यहां का तापमान आसपास से ठंडा महसूस होता है – कुछ स्थानीय लोग इसे भी मंदिर की “प्राकृतिक वास्तुकला” का हिस्सा मानते हैं, जैसे पुराने वास्तुकारों ने जानबूझकर पेड़ों को मंदिर की शीतलता बनाए रखने के लिए बचाया हो।

और पढ़ें: रथ यात्रा के तीसरे दिन आखिर क्यों टूटता है भगवान जगन्नाथ के रथ का पहिया? जानिए देवी लक्ष्मी के ‘गुस्से’ की अनोखी कथा

सैकड़ों साल में बदलता रहा स्वरूप

एक दिलचस्प बात यह है कि निर्माण के बाद से मंदिर के ढांचे में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं। मंडप का विस्तार, सीढ़ियों का पुनर्निर्माण, और परिसर में नए निर्माण जुड़ते गए, लेकिन मूल गर्भगृह और शिखर की बनावट में आज भी सत्रहवीं सदी की झलक बाकी है। यही कारण है कि आर्किटेक्चर के जानकार इसे “जीवित विरासत” कहते हैं – एक ऐसा ढांचा जो समय के साथ बदला तो, लेकिन अपनी आत्मा नहीं खोई।

धार्मिक महत्व – सिर्फ मंदिर नहीं, आस्था का केंद्र

रांची का जगन्नाथपुर मंदिर सिर्फ स्थापत्य के लिए नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक ऊर्जा के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यहां भगवान जगन्नाथ के साथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा होती है – ठीक वैसे ही जैसे पुरी में होती है।

साल की सबसे बड़ी घटना है रथ यात्रा। आषाढ़ महीने में निकलने वाली इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथों पर सवार होकर मौसीबाड़ी की ओर प्रस्थान करते हैं, जहां वे नौ दिनों तक विराजते हैं। इस दौरान पूरा इलाका मेले जैसा माहौल ले लेता है – लाखों श्रद्धालु रथ की रस्सी खींचने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं।

रथ यात्रा से पहले देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान का महास्नान होता है, जिसके बाद वे 15 दिनों के एकांतवास में चले जाते हैं। इस दौरान परंपरा के अनुसार भगवान को “अस्वस्थ” माना जाता है और उनके दर्शन बंद रहते हैं – इस अवधि में सिर्फ राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के ही दर्शन होते हैं। एकांतवास खत्म होने पर नेत्रदान महोत्सव में भगवान की आंखें फिर से रंगी जाती हैं, और उसके अगले दिन भव्य रथ यात्रा निकलती है।

सावन के महीने में भी यहां भक्तों की खासी भीड़ रहती है, और नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में विशेष अनुष्ठान आयोजित होते हैं। मंदिर की यह पूरी परंपरा बताती है कि यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि झारखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है।

और पढ़ें: जब रातों-रात ढह गया था रांची का जगन्नाथपुर मंदिर… आज भी लोग भूल नहीं पाए वो मंजर

यह मंदिर इतना खास क्यों है?

  • यह पूर्वी भारत के उन दुर्लभ मंदिरों में से एक है, जिसे पूरी तरह पुरी जगन्नाथ मंदिर की परंपरा और वास्तुशैली को ध्यान में रखकर बनवाया गया।
  • यह अकेला ऐसा मंदिर है जो नागवंशी राजपरिवार की व्यक्तिगत श्रद्धा से बना, राजकोष की परियोजना के तौर पर नहीं।
  • इसकी अवस्थिति – समुद्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर – इसे भारत के उन कुछ जगन्नाथ मंदिरों में शामिल करती है जो तटीय क्षेत्र से बाहर स्थित हैं।
  • इसकी रथ यात्रा झारखंड की सबसे बड़ी सामूहिक धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है।

दिलचस्प और कम जाने-माने तथ्य

  • मंदिर के निर्माण की प्रेरणा राजा के स्वप्न से जुड़ी बताई जाती है, जो इसे बाकी राजसी मंदिरों से अलग एक भावनात्मक कहानी देती है।
  • मंदिर पहाड़ी को अब स्थानीय बोलचाल में जगन्नाथपुर पहाड़ी कहा जाता है, और यही नाम आगे पूरे इलाके की पहचान बन गया।
  • मंदिर परिसर से रांची शहर का मनोरम दृश्य दिखता है, खासकर मानसून के दौरान जब आसपास की पहाड़ियां हरी चादर में लिपटी होती हैं।
  • मौसीबाड़ी, जहां भगवान नौ दिन रुकते हैं, मुख्य मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है और रथ यात्रा के दौरान यह जगह भी उतनी ही चर्चा में रहती है जितना मुख्य मंदिर।

दर्शन का समय और नियम

सामान्य दिनों में मंदिर सुबह के समय से दर्शन के लिए खुल जाता है और दोपहर में पूजा-विधि के कारण कुछ घंटों के लिए बंद रहता है, फिर शाम को दोबारा भक्तों के लिए खोला जाता है। रथ यात्रा और देव स्नान जैसे विशेष पर्वों पर समय में बदलाव होता है – जैसे देव स्नान पूर्णिमा पर सुबह से दोपहर तक ही दर्शन होते हैं, इसके बाद अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं। स्थानीय पर्व-कैलेंडर और मंदिर प्रबंधन की घोषणाओं के अनुसार समय में बदलाव संभव है, इसलिए विशेष तिथियों पर जाने से पहले ताज़ा जानकारी लेना बेहतर रहता है।

मंदिर में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है। हां, विशेष पूजा या दर्शन में सहायता के लिए कुछ सेवाएं शुल्क आधारित हो सकती हैं।

कैसे पहुंचें

मंदिर रांची शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर धुर्वा क्षेत्र में स्थित है। रांची जंक्शन और हटिया जंक्शन दोनों से मंदिर तक टैक्सी, ऑटो या ई-रिक्शा से आसानी से पहुंचा जा सकता है। हवाई मार्ग से आने वालों के लिए बिरसा मुंडा एयरपोर्ट सबसे नज़दीक है, जहां से मंदिर तक का सफर टैक्सी या कैब से पूरा किया जा सकता है। सड़क मार्ग से रांची शहर के किसी भी कोने से मंदिर तक पहुंचना आसान है, और मंदिर परिसर के पास वाहन पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।

आसपास घूमने की जगहें

मंदिर देखने के बाद आप आसपास की कुछ जगहों का भी रुख कर सकते हैं – नज़दीकी पार्क और झीलें इस इलाके की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं। धुर्वा डैम का शांत किनारा और आसपास के छोटे मंदिर भी परिवार के साथ शाम बिताने के लिए अच्छे विकल्प हैं।

यात्रियों के लिए काम की बातें

  • मंदिर पहाड़ी पर स्थित है, इसलिए आरामदायक जूते पहनकर जाएं।
  • मानसून में सीढ़ियां फिसलन भरी हो सकती हैं, थोड़ा सावधानी बरतें।
  • भीड़ के समय – खासकर रथ यात्रा और सावन में – सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहता है।
  • मंदिर परिसर के भीतर फोटोग्राफी को लेकर परिसर में लगे निर्देशों का पालन करें; गर्भगृह के भीतर आमतौर पर फोटो लेने की अनुमति नहीं होती।
  • सर्दी और मानसून का मौसम दर्शन के लिए सबसे सुहावना माना जाता है, जबकि गर्मियों की दोपहर में पहाड़ी चढ़ते समय पानी साथ रखना ज़रूरी है।

रांची का जगन्नाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है। यह एक राजा की उस भक्ति की निशानी है, जिसने सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे हुए भी अपनी प्रजा को भगवान जगन्नाथ के दर्शन का सुख देने की ठान ली थी। इसकी वास्तुकला में छिपा रहस्य यही है कि यह मंदिर न पूरी तरह उड़िया है, न पूरी तरह झारखंडी – यह दोनों का वह संगम है, जो सदियों पहले एक राजा के सपने से निकला और आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ खड़ा है। अगली बार जब आप रांची में हों, तो सिर्फ दर्शन के लिए नहीं, बल्कि इस पहाड़ी पर छिपी उस कहानी को महसूस करने के लिए भी यहां जरूर जाएं।

FAQ (Question-Answer Format)

  1. जगन्नाथ मंदिर रांची का निर्माण कब और किसने कराया था? इस मंदिर का निर्माण सन् 1691 में नागवंशी राजा ठाकुर एनी नाथ शाहदेव ने कराया था।
  2. रांची का जगन्नाथ मंदिर कहां स्थित है? यह मंदिर रांची शहर से लगभग 10 किमी दूर धुर्वा क्षेत्र के जगन्नाथपुर इलाके की एक पहाड़ी पर स्थित है।
  3. क्या रांची का जगन्नाथ मंदिर पुरी मंदिर जैसा ही है? इसकी बनावट पुरी के जगन्नाथ मंदिर से प्रेरित है, लेकिन नक्काशी और शैली में स्थानीय झारखंडी और राजस्थानी वास्तुकला का प्रभाव भी नजर आता है।
  4. मंदिर में किन देवताओं की पूजा होती है? यहां भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की पूजा होती है।
  5. मंदिर में रथ यात्रा कब निकलती है? हर साल आषाढ़ महीने में रथ यात्रा निकलती है, जिसमें भगवान भव्य रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी की ओर प्रस्थान करते हैं।
  6. जगन्नाथ मंदिर रांची में प्रवेश शुल्क कितना है? मंदिर में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है।
  7. रांची जगन्नाथ मंदिर तक कैसे पहुंचें? रांची जंक्शन या हटिया जंक्शन से टैक्सी, ऑटो या ई-रिक्शा से मंदिर पहुंचा जा सकता है; हवाई मार्ग से बिरसा मुंडा एयरपोर्ट सबसे नज़दीक है।
  8. मंदिर में दर्शन का सही समय क्या है? सामान्य दिनों में मंदिर सुबह खुलता है और दोपहर में कुछ घंटों के लिए बंद रहता है, फिर शाम को दोबारा खुलता है; विशेष पर्वों पर समय बदल सकता है।
  9. एकांतवास के दौरान क्या मंदिर बंद रहता है? नहीं, एकांतवास के दौरान केवल जगन्नाथ जी की मूल प्रतिमा के दर्शन बंद रहते हैं; इस दौरान राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं के दर्शन होते रहते हैं।
  10. मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? सर्दी और मानसून का मौसम दर्शन के लिए सबसे सुहावना माना जाता है, जबकि रथ यात्रा के समय यहां का माहौल सबसे भव्य होता है।

 

Akash Singh
Akash Singh

IT Executive और SEO Specialist. मैं एंगेजिंग और SEO-ड्रिवन कंटेंट लिखकर टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑर्गेनिक ग्रोथ के बीच एक मजबूत तालमेल बनाता हूँ, जिससे वेबसाइट को बेहतरीन रैंकिंग और कन्वर्जन मिलता है।

Related Posts

Preparations for major changes at RIMS Ranchi: 200 new ventilators, robotic surgery, smart classrooms, and airport-style restrooms to be set up.
Jharkhand

RIMS Ranchi में बड़े बदलाव की तैयारी: 200 नए वेंटिलेटर, रोबोटिक सर्जरी, स्मार्ट क्लासरूम और एयरपोर्ट जैसे शौचालय बनेंगे

जुलाई 21, 2026
आज का राशिफल 21 जुलाई 2026: इन राशि वालो को रहना होगा सावधान नहीं तो टूट जाएगा घर! जाने कैसा रहेगा आपका राशिफल
रांची Ranchi

आज का राशिफल 21 जुलाई 2026: इन राशि वालो को रहना होगा सावधान नहीं तो टूट जाएगा घर! जाने कैसा रहेगा आपका राशिफल

जुलाई 21, 2026
Sonam Wangchuk's fast continues into the 23rd day; he has announced he will persist with the hunger strike, deeply upset by the action taken against the youth.
Breaking News

Sonam Wangchuk का अनशन 23वें दिन भी जारी, युवाओं पर कार्रवाई से आहत होकर भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान

जुलाई 20, 2026
Next Post
Hemant Soren का बड़ा निर्देश: एक महीने में तैयार होगा झारखंड के वनों का डिजिटल रिकॉर्ड

Hemant Soren का बड़ा निर्देश: एक महीने में तैयार होगा झारखंड के वनों का डिजिटल रिकॉर्ड

Jharkhand Weather Update: रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश और ठनके की चेतावनी

Jharkhand Weather Update: रांची समेत कई जिलों में भारी बारिश और ठनके की चेतावनी

Tara Sutaria and Veer Pahadia have separated! What happened after the AP Dhillon concert?

Tara Sutaria–Veer Pahariya का Breakup! क्या एपी ढिल्लों का कॉन्सर्ट बना वजह?

Yash's latest look for 'Toxic'

Yash's latest look for 'Toxic'

महिन्द्रा की धांसू SUV XUV 7XO लॉन्च

Ashnoor Kaur wreaked havoc in her hot look

Hot Look में आश्नूर कौर ने ढाया कहर

Congress attacks BJP over JPSC siege: "Failed to stop paper leaks for 12 years, now playing politics in the name of the youth."

BJP के JPSC घेराव पर Congress का हमला, कहा- 12 साल पेपर लीक नहीं रोक पाए, अब युवाओं के नाम पर राजनीति

जुलाई 21, 2026

RIMS Ranchi में बड़े बदलाव की तैयारी: 200 नए वेंटिलेटर, रोबोटिक सर्जरी, स्मार्ट क्लासरूम और एयरपोर्ट जैसे शौचालय बनेंगे

Breaking News: चतरा में SP आवास के सामने गोली मारकर हत्या

Monsoon Tips: बारिश में इन सब्जियों को खाने से पहले हो जाएं सावधान! छोटी सी लापरवाही बन सकती है बीमारी की वजह

झारखंड में ब्यूरोक्रेसी पर BJP का बड़ा हमला, बोली- जनप्रतिनिधियों की नहीं सुन रहे अधिकारी, सरकार पूरी तरह विफल

NEET Paper Leak पर PM मोदी का पहला बड़ा बयान, उधर संसद में जबरदस्त हंगामा, सदन 2 बजे तक स्थगित

Khabar Mantra

© 2025 Khabar Mantra

Navigate Site

  • Home
  • Privacy Policy
  • Corrections Policy
  • Editorial Policy
  • Terms of Service (नियम और शर्तें)
  • Corrections Policy
  • Editorial Policy
  • About Us
  • About Editor
  • Contact Us

Follow Us

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • Home
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
  • देश
  • क्राइम
  • धर्म-अध्याय
  • बिहार
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
  • खबर हटके

© 2025 Khabar Mantra