Ranchi: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मुद्दे पर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शनिवार को कांग्रेस, झामुमो, राजद, सपा और अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो दल राष्ट्रीय स्तर पर नीट जैसे मामलों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, वे झारखंड में सामने आए परीक्षा विवादों पर चुप्पी साधे हुए हैं।
रघुवर दास ने सवाल उठाते हुए कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़े मामलों में कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी सहयोगी सरकार से जवाब क्यों नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं, लेकिन राज्य सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का काम कर रही है।
यूपी में ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को जेपीएससी परीक्षा की जिम्मेदारी कैसे दी गई
उन्होंने कहा कि झारखंड में एक साथ कई प्रतियोगी परीक्षाओं को स्थगित किया जाना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। रघुवर दास ने दावा किया कि 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा से लेकर संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में पाठ्यक्रम से बाहर सवाल पूछे जाने तक कई गंभीर मामले सामने आए हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कथित रूप से ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को जेपीएससी परीक्षा की जिम्मेदारी कैसे दी गई, इसकी जांच होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने इन सभी मामलों की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता युवा मोर्चा लगातार छात्र हित में आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा पेपर लीक मामलों में सख्त कानून बनाए जाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का भी उल्लेख किया।जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग
इस दौरान रघुवर दास ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि छात्रों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने के बजाय अपने भविष्य और करियर को प्राथमिकता देनी चाहिए तथा लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचानी चाहिए। रघुवर दास ने कहा कि यदि कांग्रेस को वास्तव में छात्रों की चिंता है, तो उसे झारखंड सरकार से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को मिलकर सार्थक चर्चा करनी चाहिए, ताकि भविष्य में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
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