रांची, 13 अगस्त 2026: झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पारित ‘खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026’ का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इस संशोधन को राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों को कमजोर करने वाला कदम बताते हुए केंद्र सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
प्रदीप यादव ने कहा कि खनिज संसाधनों को लेकर राज्यों को मिले अधिकारों को सीमित करने की कोशिश देश के वित्तीय संघीय ढांचे और सहकारी संघवाद के खिलाफ है। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के फैसले के बाद राज्यों को खनिज संसाधनों पर अतिरिक्त सेस लगाने का जो अधिकार मिला था, केंद्र सरकार का मौजूदा संशोधन उसी अधिकार को प्रभावित करता है।
झारखंड की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर
कांग्रेस नेता ने कहा कि खनिज संसाधन झारखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे में खनिज कानून में प्रस्तावित बदलाव का राज्य की आय और विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों की आर्थिक स्वायत्तता को कमजोर कर उन्हें अपने अधिकारों और विकास के लिए केंद्र पर अधिक निर्भर बनाने की कोशिश कर रही है।
प्रदीप यादव ने कहा कि झारखंड में गरीबों, महिलाओं, किसानों और जरूरतमंदों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं। यदि राज्य के राजस्व संसाधनों पर असर पड़ता है तो इन योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन पर भी दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से ‘मंईयां सम्मान योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका असर लाखों महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक हितों से जुड़ा है।
‘जल, जंगल, जमीन और खनिज’ के अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी
प्रदीप यादव ने कहा कि कांग्रेस ने संसद में इस विधेयक का विरोध किया है और झारखंड में भी पार्टी राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता अपने जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर अधिकार की लड़ाई को कमजोर नहीं होने देगी।
उन्होंने केंद्र सरकार से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने की अपील की। प्रदीप यादव ने मांग की कि भारत सरकार खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर पुनर्विचार करे और इसे वापस ले।








