Amitabh Bachchan Case: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कुछ प्रतिवादियों के साथ समझौते की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 16 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर समझौता नहीं हो पाता और अमिताभ बच्चन कानूनी लड़ाई आगे जारी रखना चाहते हैं, तो उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह निर्देश जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने सुनवाई के दौरान दिया। मामले में कुछ प्रतिवादियों के साथ सहमति बनने की जानकारी अदालत को दी गई है, लेकिन समझौते से संबंधित औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं।
समझौते पर हस्ताक्षर बाकी, कोर्ट ने दी समयसीमा
सुनवाई के दौरान अमिताभ बच्चन की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ प्रतिवादियों के साथ समझौता हो चुका है। हालांकि, लॉजिस्टिक्स से जुड़ी परेशानियों के कारण समझौते के दस्तावेजों पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं हो सके हैं। इससे पहले 9 अक्टूबर को हुई सुनवाई में भी समझौते की स्थिति अदालत के सामने रखी गई थी। इसके बाद कोर्ट ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए 16 नवंबर 2026 तक का समय दिया।
अदालत ने साफ किया कि यदि तय समय तक समझौता पूरा नहीं होता या कुछ दावे अनसुलझे रह जाते हैं, तो अमिताभ बच्चन को यह स्पष्ट करना होगा कि वे किन मुद्दों पर मुकदमा जारी रखना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में अगली सुनवाई पर उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी होगी।
क्या है अमिताभ बच्चन का पर्सनैलिटी राइट्स मामला?
अमिताभ बच्चन ने साल 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका का उद्देश्य अपने नाम, आवाज, तस्वीर, चेहरे और पहचान से जुड़े दूसरे पहलुओं के अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगवाना था। याचिका में बताया गया था कि कई लोग अभिनेता की लोकप्रियता का फायदा उठाकर उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। इनमें फर्जी लॉटरी और कौन बनेगा करोड़पति (KBC) से जुड़े दावे, व्हाट्सऐप संदेश, वेबसाइट और मोबाइल ऐप शामिल थे।
ऐसे मामलों में लोगों को अमिताभ बच्चन के नाम का इस्तेमाल करके भ्रामक संदेश भेजे जाने या कथित इनाम का लालच दिए जाने का खतरा रहता है। इससे उनकी प्रतिष्ठा के साथ-साथ आम लोगों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
2022 में हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन को दी थी राहत
नवंबर 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन के पक्ष में अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके तहत उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, आवाज, तस्वीर और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं का व्यावसायिक इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने संबंधित सरकारी विभागों और दूरसंचार कंपनियों को भी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसमें शिकायत में सामने आए कुछ लिंक और वेबसाइट हटाने तथा कथित तौर पर भ्रामक संदेश फैलाने वाले फोन नंबरों के खिलाफ कार्रवाई जैसे कदम शामिल थे।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि डिजिटल दौर में किसी मशहूर व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी विज्ञापन, ऑनलाइन धोखाधड़ी और भ्रामक सामग्री तैयार करना आसान हो गया है।
क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?
पर्सनैलिटी राइट्स का संबंध किसी व्यक्ति की पहचान और उससे जुड़े व्यावसायिक हितों की सुरक्षा से है। इसमें नाम, तस्वीर, आवाज, चेहरे और पहचान के दूसरे विशिष्ट पहलुओं का इस्तेमाल शामिल हो सकता है। किसी लोकप्रिय अभिनेता या सार्वजनिक हस्ती की पहचान का इस्तेमाल विज्ञापन, उत्पादों की बिक्री या प्रचार के लिए किया जाता है, तो कई परिस्थितियों में उनकी अनुमति और लागू कानूनी नियम महत्वपूर्ण हो जाते हैं। हालांकि, हर इस्तेमाल अपने आप गैरकानूनी नहीं होता। किसी मामले का फैसला उसके तथ्यों, उद्देश्य और लागू कानूनों के आधार पर किया जाता है।
अमिताभ बच्चन का मामला इस बात पर ध्यान खींचता है कि किसी सेलिब्रिटी की लोकप्रियता का फायदा उठाकर उनकी पहचान का अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल कैसे रोका जाए।
आराध्या से जया बच्चन तक, परिवार के दूसरे सदस्य भी पहुंचे अदालत
बच्चन परिवार के अन्य सदस्य भी अपनी पहचान और प्रतिष्ठा की सुरक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपना चुके हैं।
आराध्या बच्चन: अप्रैल 2023 में अमिताभ बच्चन की पोती आराध्या बच्चन के स्वास्थ्य को लेकर यूट्यूब पर प्रसारित भ्रामक वीडियो का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था। अदालत ने संबंधित वीडियो हटाने के निर्देश दिए थे।
ऐश्वर्या राय बच्चन: सितंबर 2025 में ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने नाम, तस्वीरों और आवाज के कथित अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ याचिका दायर की थी। शिकायत में AI से तैयार वीडियो और ऑनलाइन प्रसारित अन्य सामग्री के जरिए उनकी पहचान के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया था।
अभिषेक बच्चन: 10 सितंबर 2025 को अभिषेक बच्चन के मामले में भी अदालत से राहत मिली थी। उनके नाम, तस्वीरों और आवाज का कथित तौर पर व्यावसायिक सामान बेचने और AI आधारित भ्रामक वीडियो तैयार करने में इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था।
जया बच्चन: नवंबर 2025 में जया बच्चन ने अपनी तस्वीरों के कथित दुरुपयोग, फर्जी वीडियो और बिना अनुमति उत्पाद बेचने के खिलाफ अदालत का रुख किया था। अदालत ने उनकी पहचान की सुरक्षा के संबंध में निर्देश दिए थे, जबकि फिल्म ‘अभिमान’ के वैध प्रचार पोस्टरों को हटाने से इनकार किया था।
अब आगे क्या होगा?
अमिताभ बच्चन के मामले में अब समझौते की प्रक्रिया पूरी होना महत्वपूर्ण है। 16 नवंबर 2026 तक संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मामले की आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है। यदि सभी संबंधित विवाद समझौते से सुलझ जाते हैं, तो आगे की कानूनी प्रक्रिया उसी के अनुरूप बढ़ेगी। लेकिन यदि कुछ मुद्दे बाकी रहते हैं और अमिताभ बच्चन उन पर मुकदमा जारी रखना चाहते हैं, तो अदालत ने उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति की शर्त स्पष्ट कर दी है।
फिलहाल, इस मामले में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम समझौते की स्थिति और अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई पर निर्भर करेगा।
क्या भारत में पर्सनैलिटी राइट्स के लिए अलग कानून है?
भारत में पर्सनैलिटी राइट्स को नियंत्रित करने वाला एक व्यापक, समर्पित कानून नहीं है। हालांकि, अदालतें अलग-अलग मामलों में लागू कानूनों और कानूनी सिद्धांतों के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान, निजता और व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए आदेश दे सकती हैं।
इसी वजह से अमिताभ बच्चन जैसे चर्चित लोगों के मामले अहम माने जाते हैं। ये मामले डिजिटल प्लेटफॉर्म, विज्ञापन और AI से तैयार सामग्री के दौर में किसी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़े सवालों को सामने लाते हैं।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









