Breaking News: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवालें उठ रही हैं। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने गुरुवार को आयोग पर सवाल खड़े करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर दी है।
सीजेपी की दावा है कि SIR के दौरान 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। पार्टी फाउंडर अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीखी टिप्पणी करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।
14 बार चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों पर आपत्तियां दर्ज
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के जरिए लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ रहा है। हालांकि, ये CJP के राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं रखा जा सकता।
बताते चलें कि द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, SIR की प्रक्रिया के बीच पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 बार विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आधिकारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों का उल्लेख है।
तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए हैं सभी निर्णय
इसी रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से हुए हैं।
ऐसे में SIR को लेकर एक तरफ राजनीतिक दल और अन्य आलोचक पारदर्शिता तथा मतदाता अधिकारों से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है। विवाद का केंद्र अब SIR की प्रक्रिया के साथ-साथ चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया भी बन गई है।

I have four years of experience in journalism. Previously, I worked with organizations such as Swadesh Today, News 11 Bharat, and News 22 Scope. For the past year, I have been working as a content writer at Khabar Mantra.








