Ranchi:झारखंड में 14वीं जेपीएससी परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर बड़ा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी स्वतः नहीं होती, बल्कि सुनियोजित तरीके से कराई जाती है। उन्होंने कहा कि जेपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे और सीआईडी जांच के बावजूद सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
निष्पक्ष जांच होने पर कई बड़े नाम आ सकते हैं सामने
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस दिन इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी, उस दिन कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी जांच का इस्तेमाल दोषियों को बचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने पूर्व के जेएसएससी पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी सरकार ने सीआईडी को जांच सौंपी थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि उस मामले में अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर प्रश्नपत्र रटवाने तक के आरोप लगे थे और मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को पहले से गड़बड़ी की जानकारी थी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार द्वारा जेपीएससी मामले की जांच सीआईडी से कराना केवल आईवॉश है। उनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़े कई तथ्य सार्वजनिक हैं, लेकिन सरकार उन पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते केवल इस्तीफा देकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उनके अनुसार, उन्हें जनवरी महीने से ही परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जानकारी थी, बावजूद इसके उन्होंने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
बाबूलाल मरांडी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूले जाने की बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रारंभिक परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक अभ्यर्थियों को कथित तौर पर 40 लाख रुपये तक देने पड़ते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
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दर्ज की गई एफआईआर को जानबूझकर कमजोर बनाया गया
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेपीएससी घोटाले में दर्ज की गई एफआईआर को जानबूझकर कमजोर बनाया गया है। उनके मुताबिक, अब तक एफआईआर को सार्वजनिक नहीं किया गया है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज नहीं किया गया है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
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प्रेस वार्ता के दौरान बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी अध्यक्ष सुधीर गुप्ता पर भी निशाना साधा। उन्होंने उन्हें भ्रष्ट अधिकारी बताते हुए कहा कि यदि राज्य में अधिकारियों और कर्मचारियों की भर्ती करने वाली संस्थाओं पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगेंगे, तो झारखंड को योग्य और ईमानदार अधिकारी कैसे मिल पाएंगे।
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गौरतलब है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा के परिणाम के बाद कई अभ्यर्थी और छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगा रहे हैं। मामले की जांच फिलहाल सीआईडी कर रही है, जबकि सरकार की ओर से निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया गया है। ऐसे में यह विवाद राज्य की राजनीति और युवाओं के भविष्य, दोनों के लिए एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
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