विवाद की जड़
पूरा मामला 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा से शुरू हुआ। परीक्षा खत्म होते ही पेपर लीक और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने लगीं। सरकार ने जांच CBI को सौंपी और परीक्षा रद्द कर 21 जून को दोबारा कराने का ऐलान किया, लेकिन तब तक लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा डगमगा चुका था। इसी बीच मई के आखिरी हफ्तों में एक सरकारी अधिकारी की टिप्पणी ने आग में घी का काम किया — बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से कर दी गई। इसी टिप्पणी के जवाब में अभिजीत दिपके ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम से एक अभियान शुरू किया, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया से निकलकर देशभर के छात्र आंदोलन में बदल गया।पूरी घटना की टाइमलाइन
- 3 मई 2026: NEET-UG परीक्षा आयोजित; बाद में पेपर लीक के आरोप सामने आए।
- मई अंत: सरकारी अधिकारी की ‘कॉकरोच’ टिप्पणी पर अभिजीत दिपके ने CJP अभियान शुरू किया।
- 6 जून: CJP का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन आयोजित हुआ।
- 20 जून: दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू, जो जल्द ही मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों तक फैल गया।
- 21 जून: NEET-UG की दोबारा परीक्षा कराई गई।
- 28 जून: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन से जुड़े और भूख हड़ताल पर बैठ गए।
- 20 जुलाई: ‘चलो पार्लियामेंट’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प, कई छात्र घायल; इसी दिन सोनम वांगचुक को हालत बिगड़ने पर अस्पताल भेजा गया, जहां उन्होंने अनशन जारी रखा।
- 21 जुलाई: राहुल गांधी की अगुआई में विपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया।
- 23 जुलाई: जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद; विपक्षी नेताओं का दबाव और तेज़ हुआ।
- 24 जुलाई: संविधान क्लब में CJP प्रतिनिधियों और सरकार की ओर से जेपी नड्डा व जितेंद्र सिंह के बीच अहम बैठक; सोनम वांगचुक ने लिखित आश्वासन मिलने पर 26 दिन बाद अनशन तोड़ा।
- 25 जुलाई: CJP ने सुबह साफ कर दिया कि प्रधान के इस्तीफे के बिना आगे बातचीत बेमानी होगी; कुछ ही घंटों में धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को इस्तीफा भेज दिया।
CJP की तीन मुख्य मांगें
- शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan का इस्तीफा
- परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को मुआवजा
- आंदोलन के दौरान छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी
इस्तीफे में Dharmendra Pradhan ने क्या कहा
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि छात्रों का भविष्य किसी भी विवाद से बढ़कर है और वे नहीं चाहते कि युवाओं की पढ़ाई कानूनी-राजनीतिक खींचतान में उलझे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि बीते चार दशकों से वे छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधार से जुड़े रहे हैं, और यह फैसला देश की एकता व छात्रों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है।पक्ष में उठे बयान
- सोनम वांगचुक: सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही उन्होंने अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला बताया।
- कमल हासन (सांसद, MNM): केंद्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की।
- अभिनेत्री आलिया भट्ट: सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए छात्र आंदोलन को अपना समर्थन जताया।
- विपक्ष (कांग्रेस व INDIA गठबंधन): संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामा कर मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई।
विपक्ष में और सरकार की ओर से आए बयान
- जेपी नड्डा: राहुल गांधी पर छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
- प्रधानमंत्री कार्यालय: गड़बड़ी में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया, साथ ही मामले की जांच CBI को सौंपी गई।
- दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका: जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई, जिस पर अदालत में सुनवाई हुई।
आगे क्या
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नया शिक्षा मंत्री कौन होगा और परीक्षा प्रणाली में वादा किए गए सुधार कब तक ज़मीन पर उतरेंगे। मुआवजे और छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी को लेकर सरकार का अगला कदम भी आंदोलन की आगे की दिशा तय करेगा। CJP ने फिलहाल जंतर-मंतर पर मौजूदगी बनाए रखने का संकेत दिया है, जब तक बाकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो जाती।अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया? NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद, दो महीने से जारी छात्र आंदोलन और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) क्या है? यह एक छात्र-केंद्रित आंदोलन है, जो एक सरकारी अधिकारी की विवादित टिप्पणी के विरोध में शुरू हुआ और बाद में परीक्षा सुधार व मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन में बदल गया। सोनम वांगचुक आंदोलन से कब जुड़े? वे 28 जून को जंतर-मंतर पर आंदोलन से जुड़े और भूख हड़ताल पर बैठे, जो 26 दिन बाद सरकार से लिखित आश्वासन मिलने पर खत्म हुई। अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे मिलेगी? इस्तीफे के बाद नए मंत्री की नियुक्ति को लेकर फिलहाल आधिकारिक ऐलान का इंतजार है।
विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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