‘छोटा लड़का‘ (El Nino) बढ़ाएगा भारत की टेंशन
El Nino Impact 2026: भारत समेत पूरी दुनिया के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मौसम विभाग (IMD) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ‘अल नीनो’ (El Nino), जिसे स्पेनिश में ‘द लिटिल बॉय’ कहा जाता है, एक बार फिर सक्रिय हो रहा है। इसका सीधा असर 2026 के मानसून और वैश्विक तापमान पर पड़ने वाला है।
अल नीनो क्या है और इसे ‘छोटा लड़का‘ क्यों कहते हैं?
अल नीनो प्रशांत महासागर के गर्म होने की एक प्रक्रिया है। स्पेनिश भाषा में इसका अर्थ ‘छोटा बच्चा’ या ‘क्राइस्ट चाइल्ड’ होता है। यह घटना हर 2 से 7 साल के अंतराल पर होती है, जिससे दुनिया भर के पर्यावरणीय चक्र में गड़बड़ी आती है। जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, तो मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।
2026 में मानसून और खेती पर संकट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने संकेत दिए हैं कि 2026 में जून से सितंबर के दौरान मानसूनी बारिश औसत से कम रह सकती है। भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि:
- 70% बारिश: भारत की कुल वर्षा का 70% हिस्सा मानसून से आता है।
- अर्थव्यवस्था पर चोट: भारत की 4 ट्रिलियन की इकोनॉमी में कृषि का हिस्सा 18% है।
- खाद्यान्न उत्पादन: कम बारिश का मतलब है फसलों का खराब होना और अनाज की कमी, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।
नोट: 2009 में जब अल नीनो प्रभावी था, तब भारत ने 37 वर्षों में सबसे कम बारिश (78.2%) दर्ज की थी।
वैश्विक तापमान में होगी भारी वृद्धि
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक अल नीनो के कारण वैश्विक औसत तापमान में लगभग 0.2°C की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। यदि प्रशांत महासागर का तापमान 1.5% से अधिक बढ़ता है, तो इसे ‘सुपर अल नीनो’ माना जाएगा।
दुनिया पर अल नीनो का प्रभाव
| क्षेत्र | संभावित प्रभाव |
| भारत | मानसून की कमजोरी, सूखा और भीषण गर्मी |
| ऑस्ट्रेलिया & इंडोनेशिया | जंगलों में आग और सूखे का खतरा |
| दक्षिण अमेरिका (पेरू/इक्वाडोर) | भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ |
| यूनाइटेड किंगडम (UK) | सामान्य से अधिक कड़ाके की ठंड |
| अमेरिका (गल्फ कोस्ट) | सर्दियों में अत्यधिक नमी और बारिश |
क्या कहता है मौसम का नया मॉडल?
वर्तमान वेदर मॉडल के अनुसार, ला नीना (La Nina) का प्रभाव समाप्त हो रहा है और अल नीनो के सक्रिय होने की संभावना 66% तक है। दिल्ली जैसे शहरों में अभी से तापमान 40% के पार जाने लगा है, जो आने वाली भीषण गर्मी का संकेत है।
इससे पहले 2015-16 में आए शक्तिशाली अल नीनो ने पृथ्वी के तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा दिया था, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघली थी। वैज्ञानिकों को डर है कि 2026 में वही पुराना पैटर्न फिर से दोहराया जा सकता है।
अल नीनो भले ही प्रशांत महासागर के एक छोटे से हिस्से में पैदा होता है, लेकिन इसका असर 150 करोड़ की आबादी वाले भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ता है। बदलती जलवायु और बढ़ते तापमान के बीच, 2026 का साल मौसम के लिहाज से काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है।













