नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के पहले दिन केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम संशोधन विधेयक पेश किए। इन बिलों के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 2029 से 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव रखा गया है। इस ऐतिहासिक कदम को लागू करने के लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं।नई व्यवस्था लागू करने के लिए परिसीमन (Delimitation) भी कराया जाएगा, जिसके बाद करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
संसद में लंबी बहस की तैयारी
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन संशोधन बिल पेश करेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 पेश करेंगे। इन विधेयकों पर लोकसभा में 18 घंटे और राज्यसभा में 10 घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चर्चा में हिस्सा लेकर अपनी बात रखेंगे। विपक्ष का विरोध और सवाल सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने सरकार पर संविधान के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल “गलत तरीके से पेश किया जा रहा है” और इसमें मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान न होना बड़ी कमी है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन लोकसभा सीटों में भारी बढ़ोतरी का विरोध करता है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष संसद में इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करेगा। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की बैठक में राहुल गांधी समेत टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और आम आदमी पार्टी के नेता शामिल हुए।
सरकार का रुख: ऐतिहासिक पहल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यह कदम देश में नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। उन्होंने लिखा कि “माताओं-बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है” और सरकार इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। क्या है आगे का रास्ता? इन विधेयकों के पारित होने के बाद परिसीमन प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके आधार पर नई सीटों का निर्धारण और आरक्षण लागू किया जाएगा। यदि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो 2029 के आम चुनाव से महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ मिलना शुरू हो सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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