Chatra: वाराणसी में यूपी ATS के साथ मुठभेड़ में मारे गए 30 लाख रुपये के इनामी बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की मौत पर उनके परिवार की ओर से सवाल उठाए गए हैं। शव पैतृक गांव लुट्टू सोहावन पहुंचने के बाद उनके छोटे भाई और सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने मुठभेड़ के पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।
गणेश गंझू ने आरोप लगाया कि बृजेश को चतरा से पकड़कर उत्तर प्रदेश ले जाया गया और वहां साजिश के तहत उसकी हत्या की गई। उन्होंने सरकार से मामले की CBI जांच कराने की मांग की। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस के दावे पर भी उठाए सवाल
पूर्व विधायक ने उस पुलिस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसके मुताबिक वाराणसी के रामनगर क्षेत्र में पुलिस टीम ने मोटरसाइकिल सवार बृजेश को रोकने की कोशिश की थी और उसने पुलिस पर फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में बृजेश को गोली लगी और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
बाइक चलाते समय दोनों हाथों से फायरिंग कैसे कर सकता है
गणेश गंझू ने सवाल उठाया कि बाइक चलाते समय दोनों हाथों से फायरिंग कैसे की जा सकती है। उन्होंने झारखंड पुलिस की भूमिका पर भी आरोप लगाए और पूरे मामले की जांच की मांग की। दूसरी ओर, यूपी पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के दौरान बृजेश की ओर से फायरिंग की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, उसकी गोली ATS कर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी थी।
बृजेश पर 30 लाख रुपए का ईनाम घोषित था
बृजेश पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख और NIA की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह प्रतिबंधित TPC का कमांडर बताया गया था।
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परिवार की ओर से बृजेश के सामाजिक कार्यों का भी उल्लेख किया गया है। गणेश गंझू ने सरकार से नक्सल नीति में बदलाव और हथियार उठाने के पीछे के सामाजिक-आर्थिक कारणों पर काम करने की मांग की।

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