Giridih: एक तरफ हम डिजिटल इंडिया और बुलेट ट्रेन की बात कर रहे हैं, वहीं झारखंड के गिरिडीह से आई एक तस्वीर ने मानवता और विकास, दोनों को शर्मसार कर दिया है। जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत मधुबन थाना क्षेत्र के दालुवाडीह गांव में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा। प्रसव पीड़ा से कराहती सुनीता सोरेन को उबड़-खाबड़ रास्तों से ग्रामीण किसी तरह मुख्य सड़क तक लेकर पहुंचे, तब जाकर इलाज संभव हो सका। आजादी के दशकों बाद भी सड़क, एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधा के लिए जूझते गांवों की यह हकीकत प्रशासनिक दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
सूचना देने के बावजूद नहीं आई एंबुलेंस
परिजनों के मुताबिक सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई थी, लेकिन एंबुलेंस गांव तक पहुंचने से मना कर दिया गया। कारण था गांव तक सड़क का नहीं होना। मजबूरी में ग्रामीणों और परिवारवालों ने मिलकर महिला को खाट पर उठाया और उबड़-खाबड़ रास्तों से पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचे।
ग्रामीणों का कहना है कि पिपराडीह तक सड़क बनी है, लेकिन उसके आगे कई गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। दालुवाडीह, कुरुवारांड, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम और अन्य गांवों में बरसात के दिनों में हालात और भयावह हो जाते हैं। बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।
सड़क नहीं तो वोट नहीं-ग्रामीणों का अल्टीमेटम
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में गांवों की सुध नहीं ली जाती। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण नहीं हुआ तो वे आगामी चुनावों में वोट बहिष्कार करेंगे।








