गुरूवार, सितम्बर 24, 2026
Khabar Mantra
No Result
View All Result
  • होम
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
  • क्राइम
  • देश
    • बिहार
  • धर्म-अध्याय
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन Entertainment
  • खबर हटके
  • टेक्नोलॉजी
Khabar Mantra

झारखंड के आदिवासी समुदाय में सावन का त्योहार कैसे मनाया जाता है, कम लोग जानते हैं ये बात

सरना स्थल की शांत पूजा से लेकर हरियाड़ पर्व तक, जानें झारखंड के आदिवासी समाज की वो परंपराएं जो धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं

अगस्त 21, 2026
in झारखंड Jharkhand News, धर्म-अध्याय
A A
झारखंड के आदिवासी गांव में सरना स्थल पर सावन के महीने में पाहन द्वारा की जाती प्रकृति पूजा, मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ ग्रामीण उपस्थित

सरना स्थल पर सावन की पूजा — जहां मंदिर नहीं, सखुआ के पेड़ ही झारखंड के आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र हैं।

Share on FacebookShare on Twitter
WhatsApp चैनल से जुड़ें ताजा समाचार सीधे WhatsApp पर पाएं
जॉइन करें
Google News पर खबर मन्त्र को फॉलो करेंझारखंड की हर ब्रेकिंग खबर के लिए स्टार दबाएं
फॉलो करें
WhatsApp चैनल से जुड़ें खबर मंत्र चुने
जिस महीने पूरे देश में शिव मंदिरों के बाहर कतारें लगती हैं, “बोल बम” के जयकारे गूंजते हैं, उसी महीने झारखंड के घने जंगलों के बीच बसे गांवों में कुछ और ही हो रहा होता है। वहां कोई मंदिर की घंटी नहीं बजती-वहां धरती को धन्यवाद दिया जाता है। वहां पूजा किसी मूर्ति की नहीं, बारिश की, जंगल की, और उस मिट्टी की होती है जिसने पीढ़ियों से इन समुदायों को जीवन दिया है। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं-झारखंड के आदिवासी समुदायों के लिए सावन सिर्फ धार्मिक महीना नहीं, बल्कि उनके पूरे जीवन-दर्शन का प्रतिबिंब है। और जब आप इसकी परतें खोलना शुरू करेंगे, तो शायद आपकी सावन को लेकर पूरी समझ ही बदल जाए।

सावन आदिवासी समाज के लिए इतना खास क्यों है

झारखंड के आदिवासी समुदायों का रिश्ता प्रकृति से किसी आस्था से बढ़कर है-यह उनका जीने का तरीका है। जंगल, पहाड़, नदी और बारिश, इनमें से कोई भी उनके लिए सिर्फ प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवित इकाई मानी जाती है। सावन का महीना इसी रिश्ते का सबसे भावुक मौसम होता है। बारिश की पहली बूंद के साथ ही खेतों में धान की रोपाई शुरू हो जाती है, और यही वह समय है जब पूरा गांव मिलकर प्रकृति से आने वाली फसल के लिए आभार जताता है। यह आभार किसी एक दिन के अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहता-यह पूरे महीने, कभी-कभी पूरे मानसून, गांव की सामूहिक ज़िंदगी में बुना रहता है। क्या आप जानते हैं? आदिवासी समाज में बारिश को सिर्फ मौसम की घटना नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के बीच के संतुलन का प्रमाण माना जाता है-इसीलिए बारिश के स्वागत में किए जाने वाले अनुष्ठान बेहद सम्मानपूर्वक निभाए जाते हैं।

सरना स्थल पर होने वाली वो शांत, गहरी पूजा

झारखंड के आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र मंदिर नहीं, सरना स्थल है-गांव के बीचोंबीच या किनारे स्थित सखुआ (साल) के पेड़ों का वह पवित्र झुरमुट, जिसे प्रकृति का जीवंत मंदिर माना जाता है। सावन के दौरान गांव का पाहन यानी पुरोहित यहीं पहुंचकर प्रकृति और गांव के देवताओं से अच्छी बारिश और अच्छी फसल की प्रार्थना करता है। पूजा में अरवा चावल, हड़िया (पारंपरिक चावल से बना पेय), और कई बार मुर्गे की भेंट शामिल होती है। यह पूजा किसी भव्य आयोजन जैसी नहीं दिखती-न लाउडस्पीकर, न सजावट-बल्कि एक शांत, गहरी और सामूहिक आस्था का दृश्य होती है, जहां पूरा गांव पाहन के इर्द-गिर्द इकट्ठा होकर मंत्रोच्चार सुनता है। इसी दौरान पूर्वजों का स्मरण भी किया जाता है। कई समुदायों में यह मान्यता है कि अच्छी फसल केवल धरती की कृपा नहीं, बल्कि पूर्वजों के आशीर्वाद से भी जुड़ी होती है, इसलिए सावन में होने वाले अनुष्ठानों में उनका आह्वान भी शामिल रहता है। लेकिन असली दिलचस्प बात अभी बाकी है-यह सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रहता, यहां से शुरू होती है झारखंड की एक बेहद खास पहचान। ये भी पढ़ें: आज भी जल रही है त्रेतायुग की अग्नि, इसी मंदिर में हुआ था शिव-पार्वती का दिव्य विवाह

संथाल समाज का “हरियाड़”-वो पर्व जिसका नाम भी कम लोगों ने सुना है

संथाल समुदाय में सावन के महीने से जुड़ा एक खास पर्व मनाया जाता है, जिसे “हरियाड़” कहा जाता है। यह पर्व सीधे धान के खेतों से जुड़ा है-जब बारिश के बाद धान के पौधों में हरियाली लौट आती है, तो इसे अच्छी फसल का संकेत मानकर मनाया जाता है। यह वही समय होता है जब संथाल समाज के लोग खेतों की हरियाली देखकर राहत की सांस लेते हैं-क्योंकि उनकी पूरी साल की खाद्य सुरक्षा इसी फसल पर टिकी होती है। हरियाड़ इसीलिए सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक समुदाय की उम्मीद और मेहनत के फल का उत्सव है। इससे पहले आषाढ़ महीने में बीज बोने के समय “एरोक” नाम का पर्व मनाया जाता है, और सावन में हरियाड़ आते-आते यह पूरा कृषि-चक्र एक भावनात्मक कहानी में बदल जाता है-बीज बोना, इंतज़ार करना, और फिर हरियाली देखकर खुश होना।

मांदर की थाप और वो गीत जो पीढ़ियों से गाए जा रहे हैं

आदिवासी उत्सवों की जान होती है उनकी संगीत परंपरा, और सावन के मौसम में यह और भी जीवंत हो उठती है। ढोल, नगाड़ा, मांदर और तुर्ही जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र गांव की शामों को भर देते हैं। जब पाहन पूजा के मंत्र जपता है, तभी ये वाद्य यंत्र भी साथ बजते हैं, मानो पूरा वातावरण ही प्रार्थना में शामिल हो गया हो। पूजा के बाद अक्सर गांव के युवा पाहन को कंधे पर बैठाकर पूरे गांव में घुमाते हैं-यह सम्मान और उत्सव, दोनों का मिला-जुला भाव होता है। महिलाएं समूह में पांता नाच जैसे पारंपरिक नृत्य करती हैं, जबकि पुरुष वाद्य यंत्र बजाते हुए साथ देते हैं। यह नृत्य मुख्यतः भूमिज, संथाल, मुंडा और हो समुदायों में देखने को मिलता है, और इसे कहीं मुंडारी नाच तो कहीं संताली नाच के नाम से भी जाना जाता है। यह संगीत किताबों में नहीं, बल्कि मुंह-ज़बानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है-बिना किसी लिखित रिकॉर्ड के, फिर भी सैकड़ों साल से जीवित। ये भी पढ़ें:झारखंड की वो परंपरा जो सावन में सिर्फ यहीं मनाई जाती है , जानें इसके पीछे की कहानी

सावन की थाली में क्या होता है

आदिवासी घरों में सावन के मौसम का भोजन भी उतना ही खास है जितनी उनकी पूजा। यह मौसम जंगल से मिलने वाले मौसमी कंद-मूल, साग-भाजी और स्थानीय अनाज का होता है। मंडुआ (रागी), गुंदली, और मक्के जैसे मोटे अनाज इस मौसम में खास तौर पर पकाए जाते हैं, क्योंकि ये बारिश के मौसम में आसानी से उपलब्ध होते हैं और सेहत के लिए भी बेहतर माने जाते हैं। हड़िया, जो चावल से बनने वाला पारंपरिक पेय है, लगभग हर पूजा और सामूहिक आयोजन का हिस्सा होता है-यह सिर्फ पेय नहीं, बल्कि आतिथ्य और सामूहिकता का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ जंगल से मिलने वाली मौसमी भाजियां और कंद इस मौसम की थाली को प्राकृतिक रूप से भरपूर बना देते हैं। रोचक तथ्य: आदिवासी समाज में भोजन पकाने और परोसने के तरीके में भी सामूहिकता झलकती है-पूजा के बाद अक्सर पूरा गांव मिलकर एक साथ भोजन करता है, जिसे सामूहिक भोज की परंपरा कहा जा सकता है।

पारंपरिक वेशभूषा: सादगी में छिपी पहचान

सावन के अनुष्ठानों और उत्सवों में आदिवासी समाज की वेशभूषा भी अपनी एक अलग कहानी कहती है। पुरुष आमतौर पर सफेद या हल्के रंग की धोती पहनते हैं, जिसे बेहद सादा लेकिन गरिमापूर्ण माना जाता है। महिलाएं पारंपरिक साड़ी पहनती हैं, जिसमें कई बार स्थानीय बुनाई और प्राकृतिक रंगों की झलक दिखती है। गहनों की बात करें तो चांदी और अन्य धातुओं से बने पारंपरिक आभूषण इस दौरान खास तौर पर पहने जाते हैं-यह सिर्फ श्रृंगार नहीं, बल्कि सामुदायिक पहचान का हिस्सा माना जाता है। यह वेशभूषा दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और आत्म-सम्मान के प्रतीक के तौर पर पहनी जाती है।

हर जनजाति की अपनी कहानी, अपना रंग

झारखंड में बसने वाली 32 जनजातियों में हर समुदाय की प्रकृति-पूजा से जुड़ी अपनी परंपराएं हैं, भले ही उनका मूल भाव एक जैसा हो-धरती, जल और वर्षा के प्रति कृतज्ञता। संथाल समुदाय में जहां हरियाड़ जैसा फसल-केंद्रित पर्व सावन से जुड़ा है, वहीं मुंडा, उरांव, हो और खड़िया समुदायों में भी सरना स्थल पर होने वाली मौसमी पूजा और सामूहिक अनुष्ठान इसी दौर में गति पकड़ते हैं, क्योंकि यह पूरा मौसम ही धान रोपाई और कृषि-चक्र की सबसे व्यस्त और भावनात्मक अवधि होती है। हर समुदाय का पाहन या पूजा करने वाला व्यक्ति भले अलग नाम से जाना जाए, लेकिन मकसद एक जैसा रहता है-प्रकृति से संतुलन बनाए रखने की प्रार्थना। यही विविधता झारखंड की सबसे बड़ी खूबी है-एक ही मौसम, अलग-अलग भाषाएं, अलग-अलग रीति-रिवाज, लेकिन एक जैसी भावना।

मुख्यधारा के सावन उत्सव से यह कितना अलग है

जहां देशभर में सावन मुख्यतः शिव-पार्वती की उपासना, व्रत और मंदिरों में जलाभिषेक तक केंद्रित रहता है, वहीं आदिवासी समाज के लिए यह महीना सीधे धरती, जंगल और फसल से जुड़ा अनुभव है। यहां पूजा का केंद्र कोई मूर्ति नहीं, बल्कि सरना स्थल जैसा प्राकृतिक स्थान होता है। यह अंतर किसी को बेहतर या कमतर नहीं ठहराता-यह सिर्फ यह दिखाता है कि भारत की सांस्कृतिक विविधता कितनी गहरी है। एक ही मौसम, एक ही समय, लेकिन आस्था को व्यक्त करने के तरीके पूरी तरह अलग। और यही झारखंड को खास बनाता है-यहां हिंदू परंपराएं और आदिवासी प्रकृति-पूजा, दोनों साथ-साथ, बिना किसी टकराव के जीवित हैं।

ये परंपराएं धीरे-धीरे कमज़ोर क्यों पड़ रही हैं

यह सच्चाई थोड़ी कड़वी है, लेकिन कहनी ज़रूरी है। रोज़गार की तलाश में गांव से शहर की ओर पलायन, शिक्षा और नौकरी के लिए युवाओं का बड़े शहरों में जाना, और आधुनिक जीवनशैली का असर-इन सबने धीरे-धीरे इन परंपराओं की जड़ों को हिलाना शुरू कर दिया है। आज कई गांवों में वो युवा पीढ़ी मौजूद ही नहीं है जो पाहन बनने की परंपरा आगे बढ़ा सके। मांदर बजाना, पारंपरिक गीत गाना, या सरना स्थल की पूजा-विधि सीखना-यह सब अब उतनी स्वाभाविकता से अगली पीढ़ी तक नहीं पहुंच पा रहा जितना पहले पहुंचता था। फिर भी, उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। झारखंड में कई सामाजिक संगठन, सांस्कृतिक समूह और शिक्षण संस्थान अब इन परंपराओं को दस्तावेज़ के रूप में सहेजने, स्कूलों में स्थानीय भाषाओं और नृत्य को शामिल करने, और सरना स्थलों के संरक्षण जैसे प्रयासों में जुटे हैं। सोशल मीडिया पर भी अब आदिवासी युवा खुद अपनी परंपराओं को वीडियो और तस्वीरों के ज़रिए दुनिया के सामने ला रहे हैं-यह एक उम्मीद की किरण है कि यह विरासत पूरी तरह खोएगी नहीं। सावन का यह पक्ष शायद टीवी पर नहीं दिखता, बड़ी हेडलाइनों में जगह नहीं पाता, लेकिन यह उतना ही सच्चा और गहरा है जितनी कोई भी परंपरा हो सकती है। झारखंड के इन गांवों में, जहां पूजा किसी मूर्ति की नहीं बल्कि पेड़ों, बारिश और मिट्टी की होती है, वहां आस्था अपने सबसे मौलिक और प्रकृति के सबसे करीब रूप में जीवित है। यह विरासत सिर्फ झारखंड की नहीं, पूरे भारत की सांस्कृतिक थाती है-और इसे जानना, समझना और सहेजना, हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।  
यह भी पढ़ें संबंधित ताज़ा ख़बरें
  • JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- सरकार की नीयत शुरू से संदिग्ध
    JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने पर बाबूलाल मरांडी का हमला, बोले- सरकार की नीयत शुरू से संदिग्ध
  • MMDR अधिनियम पर JMM के आरोपों को आदित्य साहू ने बताया भ्रामक, BJP चलाएगी जागरूकता अभियान
    MMDR अधिनियम पर JMM के आरोपों को आदित्य साहू ने बताया भ्रामक, BJP चलाएगी जागरूकता अभियान
  • MMDR कानून में संशोधन पर JMM का केंद्र पर हमला, झारखंड के अधिकारों की अनदेखी का आरोप
    MMDR कानून में संशोधन पर JMM का केंद्र पर हमला, झारखंड के अधिकारों की अनदेखी का आरोप
  • आसनसोल में एक लाख रुपये में 2 महीने के शिशु को खरीदने का आरोप, दंपति समेत 3 गिरफ्तार
    आसनसोल में एक लाख रुपये में 2 महीने के शिशु को खरीदने का आरोप, दंपति समेत 3 गिरफ्तार
Akash Kumar Singh Tech entrepreneur
Akash Singh

Akash Kumar Singh is an IT Executive & SEO Specialist at Khabar Mantra. A Full-Stack Developer, AI/ML Engineer, and EdTech Founder (Dilwado), he scales platforms serving 10K+ students, commands a 400K+ subscriber tech channel, and drives high-performance web growth.

📌 यह भी पढ़ें:
  • भावुक हुए सीएम हेमंत सोरेन-मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा को दी श्रद्धांजलि
  • देवघर में छह जिलों की पेयजल योजनाओं की समीक्षा, लापरवाही पर एजेंसी और संवेदकों पर होगी कार्रवाई
  • झारखंड BJP में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, पवन साय बने संगठन महामंत्री

Table of Contents

झारखंड मुख्य समाचार एवं विश्लेषण
Special Coverage

Toggle
  • सावन आदिवासी समाज के लिए इतना खास क्यों है
  • सरना स्थल पर होने वाली वो शांत, गहरी पूजा
  • संथाल समाज का “हरियाड़”-वो पर्व जिसका नाम भी कम लोगों ने सुना है
  • मांदर की थाप और वो गीत जो पीढ़ियों से गाए जा रहे हैं
  • सावन की थाली में क्या होता है
  • पारंपरिक वेशभूषा: सादगी में छिपी पहचान
  • हर जनजाति की अपनी कहानी, अपना रंग
  • मुख्यधारा के सावन उत्सव से यह कितना अलग है
  • ये परंपराएं धीरे-धीरे कमज़ोर क्यों पड़ रही हैं
झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्ट
Special Report
खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
Exclusive
ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स
Top Video
ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स
Top Updates

Related Posts

भावुक हुए सीएम हेमंत सोरेन-मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा को दी श्रद्धांजलि
राजनीति Politics

भावुक हुए सीएम हेमंत सोरेन-मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा को दी श्रद्धांजलि

सितम्बर 24, 2026
देवघर में छह जिलों की पेयजल योजनाओं की समीक्षा, लापरवाही पर एजेंसी और संवेदकों पर होगी कार्रवाई
देवघर Deoghar

देवघर में छह जिलों की पेयजल योजनाओं की समीक्षा, लापरवाही पर एजेंसी और संवेदकों पर होगी कार्रवाई

सितम्बर 24, 2026
Major organizational reshuffle in Jharkhand BJP; Pawan Sahay appointed Organization General Secretary.
झारखंड Jharkhand News

झारखंड BJP में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, पवन साय बने संगठन महामंत्री

सितम्बर 24, 2026
Next Post
कोडरमा में IB और पुलिस की छापेमारी, पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल से जुड़े 5 लोग हिरासत में

कोडरमा में IB और पुलिस की छापेमारी, पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल से जुड़े 5 लोग हिरासत में

JPSC-JSSC Controversy: Sudesh Mahto attacks Hemant government; demands a fair probe into the entire recruitment process, not just arrests.

JPSC-JSSC विवाद: सुदेश महतो का हेमंत सरकार पर हमला, बोले- सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, पूरी भर्ती प्रक्रिया की हो निष्पक्ष जांच

Tara Sutaria and Veer Pahadia have separated! What happened after the AP Dhillon concert?

Tara Sutaria–Veer Pahariya का Breakup! क्या एपी ढिल्लों का कॉन्सर्ट बना वजह?

Yash's latest look for 'Toxic'

Yash's latest look for 'Toxic'

महिन्द्रा की धांसू SUV XUV 7XO लॉन्च

Ashnoor Kaur wreaked havoc in her hot look

Hot Look में आश्नूर कौर ने ढाया कहर

भावुक हुए सीएम हेमंत सोरेन-मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा को दी श्रद्धांजलि

भावुक हुए सीएम हेमंत सोरेन-मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा को दी श्रद्धांजलि

सितम्बर 24, 2026

देवघर में छह जिलों की पेयजल योजनाओं की समीक्षा, लापरवाही पर एजेंसी और संवेदकों पर होगी कार्रवाई

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पुत्री की मौत पर सुदेश महतो ने जताया शोक

झारखंड BJP में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, पवन साय बने संगठन महामंत्री

SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस का देशव्यापी आंदोलन, झारखंड में 27-28 सितंबर को प्रदर्शन

बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर! 28-30 सितंबर तक हड़ताल, रविवार को भी खुलेंगे बैंक

Khabar Mantra

© 2025 Khabar Mantra

Navigate Site

  • Home
  • Privacy Policy
  • Corrections Policy
  • Editorial Policy
  • Terms of Service (नियम और शर्तें)
  • Corrections Policy
  • Editorial Policy
  • Contact Us
  • Sitemap

Follow Us

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
अगला लेख
✕

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • About Editor
  • About Us
  • Add
  • Contact Us
  • Contact Us
  • Corrections Policy
  • Disclaimer (अस्वीकरण)
  • Editorial Policy
  • Home
  • New Home
  • Privacy Policy
  • Privacy Policy
  • Sample Page
  • Site Map
  • Sitemap
  • Terms of Service (नियम और शर्तें)
  • Work In Progress
  • YouTube
  • खबर मन्त्र | सबकी बात सबके साथ.
  • नियम और शर्तें (Terms & Conditions)

© 2025 Khabar Mantra