Ranchi: Jharkhand में DGP की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार, 22 सितंबर को इस मामले में अहम सुनवाई होने वाली है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ करेगी।
यह मामला झारखंड में DGP की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। इसमें यह सवाल भी शामिल है कि राज्य में डीजीपी के चयन और नियुक्ति के लिए बनाई गई प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों के अनुरूप है या नहीं।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
झारखंड सरकार द्वारा DGP की नियुक्ति के लिए बनाए गए नियमों को भाजपा नेता और विधायक बाबूलाल मरांडी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि राज्य की नई प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के पुलिस सुधारों से जुड़े निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
कुछ समय बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया और अब इस पूरी प्रक्रिया की वैधता और उससे जुड़े अन्य सवालों पर सुनवाई हो रही है।
एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट ने दिलचस्पी बढ़ा दी
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मदद के लिए एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन को नियुक्त किया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश की है। रिपोर्ट में झारखंड में DGP की नियुक्ति के लिए बनाए गए नियमों के कुछ महत्वपूर्ण पहलू उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में वर्तमान डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति का भी जिक्र है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी नियुक्ति 30 दिसंबर 2025 को हुई थी, जबकि उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 31 दिसंबर 2025 थी।
एमिकस क्यूरी ने इस नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह केस में दिए गए निर्देशों के अनुरूप बताया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि एमिकस क्यूरी की राय अदालत का अंतिम फैसला नहीं है। इस मामले में अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा।
प्रकाश सिंह केस के निर्देश क्यों चर्चा में हैं?
DGP नियुक्ति से जुड़े इस सारे विवाद में प्रकाश सिंह केस के निर्देश अहम हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में डीजीपी के चयन और कार्यकाल सहित अन्य बातों पर दिशा-निर्देश दिए थे।
अब सवाल यह है कि क्या झारखंड की मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया उन निर्देशों के अनुरूप है?
22 सितंबर की सुनवाई पर सबकी नजर
अब मंगलवार को होने वाली सुनवाई में राज्य सरकार क्या दलील देती है, और सुप्रीम कोर्ट कैसे एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट में उठाए गए सवालों को देखता है, इस पर सबकी नजर होगी।
सुनवाई के बाद अदालत का रुख इस मामले की आगे की दिशा तय कर सकता है। हालांकि, झारखंड में डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया और उससे जुड़े नियमों की स्थिति केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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